- ट्री कटिंग पर घंटों कटौती,फिर भी बारिश में घंटों बिजली गुल,विभाग पर उठे सवाल
पाटन। विद्युत वितरण केंद्र सेलूद के अंतर्गत आने वाले गांवों में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि दिनभर बिजली की आंख-मिचौली जारी रहती है। दिन में तो लोग किसी तरह काम चला लेते हैं, लेकिन रात के समय बिजली गुल होने से हालात और भी कठिन हो जाते हैं।
बार-बार बिजली बंद और चालू होने से सबसे अधिक नुकसान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के व्यापारियों को उठाना पड़ रहा है। अचानक बिजली आने-जाने के कारण कई उपकरण खराब हो रहे हैं, जिससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बारिश शुरू होने से पहले ट्री कटिंग और लाइन मेंटेनेंस के नाम पर कई दिनों तक घंटों बिजली बंद रखी गई थी। विभाग की ओर से दावा किया गया था कि इन कार्यों के बाद बारिश के मौसम में बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होगी, लेकिन इसके बावजूद हल्की बारिश और तेज हवा चलने पर भी बिजली गुल हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह स्थिति विभाग की लापरवाही और अधूरे रखरखाव कार्यों की पोल खोल रही है।
बारिश के दिनों में रात के समय बिजली नहीं रहने से लोगों को अंधेरे में कीड़े-मकोड़ों, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का डर सताता रहता है। वहीं मच्छरों के प्रकोप और उमस भरी गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को रातभर परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के अधिकारियों से बिजली व्यवस्था में सुधार कर नियमित और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर प्रभावी मेंटेनेंस किया गया होता तो बारिश शुरू होते ही बिजली कटौती की समस्या उत्पन्न नहीं होती। लगातार हो रही अघोषित कटौती से आमजन में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
बिजली बंद होते ही बंद हो जाते हैं शिकायत नंबर…..
ग्रामीणों का आरोप है कि सेलूद सब स्टेशन की ओर से बिजली संबंधी जानकारी और शिकायतों के लिए जो मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं, वे बिजली कटौती के समय या तो लगातार व्यस्त (बिजी) रहते हैं या फिर बंद हो जाते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को यह तक जानकारी नहीं मिल पाती कि बिजली किस कारण से बंद हुई है और आपूर्ति कब तक बहाल होगी। जानकारी के अभाव में लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने विभाग से शिकायत निवारण व्यवस्था को दुरुस्त करने और जारी संपर्क नंबरों को हर समय सक्रिय रखने की मांग की है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से बढ़ रहा आक्रोश……
लगातार हो रही बिजली कटौती और उससे उत्पन्न समस्याओं के बावजूद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी लोगों में नाराजगी का कारण बन रही है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय जनता की सेवा और मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात करने वाले जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर मौन साधे हुए हैं। बिजली आपूर्ति की बदहाल व्यवस्था को लेकर न तो कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है और न ही संबंधित अधिकारियों पर सुधार के लिए दबाव बनाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं उठाएंगे, तब तक समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।




