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‘हर वैवाहिक विवाद क्रूरता नहीं’ : दहेज प्रताड़ना केस में

By NS
On: July 3, 2026 2:36 PM
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ठाणे। Domestic Violence: महाराष्ट्र के ठाणे की एक अदालत ने दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पति, सास और ससुर को बरी करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पंकज ए. पाटकी ने कहा कि वैवाहिक जीवन में होने वाले सामान्य झगड़े, घरेलू तनाव और छोटे-मोटे मतभेद को अपने आप कानूनी रूप से ‘क्रूरता’ नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में प्रताड़ना और आत्महत्या के बीच सीधा और ठोस संबंध साबित होना आवश्यक है।

मामला 21 वर्षीय नर्स निशा की मौत से जुड़ा है, जिसकी शादी दिसंबर 2016 में अनिल रंगनाथ गायकवाड़ से हुई थी। शादी के बाद वह ठाणे में अपने पति और सास-ससुर के साथ रहती थी। 14 मई 2018 को निशा ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इसके बाद वर्तक नगर पुलिस ने पति, सास और ससुर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए (क्रूरता) और 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया था।

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अभियोजन पक्ष के अनुसार, निशा को घरेलू कामकाज को लेकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। उस पर सोने की चेन लाने का दबाव बनाया जाता था और पहनावे को लेकर भी रोक-टोक की जाती थी। आरोप था कि ससुराल पक्ष उसे ड्रेस की जगह केवल साड़ी पहनने के लिए मजबूर करता था।

हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास हैं और अभियोजन पक्ष आरोपों के समर्थन में पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सका। अदालत ने कहा कि केवल घरेलू तनाव, सामान्य खटपट या पारिवारिक मतभेद के आधार पर किसी व्यक्ति को कानूनी रूप से क्रूरता का दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि कानून में तय मानकों के अनुरूप गंभीर प्रताड़ना साबित न हो।

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फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि दंपति सास-ससुर से अलग मंजिल पर रहते थे और पति अपनी पत्नी की नौकरी में सहयोग करता था। वह नियमित रूप से उसे ड्यूटी पर छोड़ने और वापस लाने का काम करता था। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि निशा इस बात से परेशान थी कि वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण वह नासिक में एक रिश्तेदार की शादी में शामिल नहीं हो सकी। अदालत ने कहा कि इस प्रकार की परिस्थितियां सामान्य पारिवारिक जीवन का हिस्सा हो सकती हैं और इन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।

सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। इसी आधार पर पति अनिल गायकवाड़, सास सोजर गायकवाड़ और ससुर रंगनाथ गायकवाड़ को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।



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