Donation Controversy: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बाद अब उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में भी दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर कथित गड़बड़ियों का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे आरोपों के बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
BKTC के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निर्देश पर जांच पैनल का गठन किया गया है। जांच समिति मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, संबंधित कर्मचारियों के बयान, दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच करेगी। उन्होंने कहा कि 2 जुलाई से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे आरोपों को गंभीरता से लेते हुए यह फैसला किया गया है, ताकि तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने लाई जा सके।

प्रारंभिक जांच के दौरान मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की गई, लेकिन फुटेज पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने के कारण विस्तृत जांच की आवश्यकता महसूस हुई। इसके बाद BKTC अध्यक्ष को पूरे मामले की जानकारी दी गई और संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया। अब गठित समिति सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
इस मामले ने उत्तराखंड की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बद्रीनाथ धाम में दान-चढ़ावे से जुड़े आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले अयोध्या राम मंदिर और अब बद्रीनाथ धाम से जुड़े आरोप करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े हैं, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की भी मांग की।
शनिवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बागेश्वर स्थित बागनाथ मंदिर परिसर में राम मंदिर और बद्रीनाथ धाम में कथित अनियमितताओं के विरोध में मौन प्रदर्शन भी किया। कांग्रेस का कहना है कि धार्मिक संस्थानों में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
इस बीच BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक अन्य दावे का भी खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति को उनका निजी सचिव बताया जा रहा है, वह वास्तव में मंदिर समिति का नियमित सरकारी कर्मचारी है और उसका निजी सचिव से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी फैलाने से बचना चाहिए और जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।
BKTC के CEO सोहन सिंह रांगड़ ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध या दोषी पाई जाती है तो उसके खिलाफ श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम, 1939 तथा कर्मचारी आचरण नियमों के तहत विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मंदिर समिति पूरी पारदर्शिता के साथ जांच कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं और आम नागरिकों से भी अपील की है कि जांच पूरी होने तक सोशल मीडिया पर किसी भी अपुष्ट या भ्रामक जानकारी को साझा न करें। समिति का कहना है कि यह मामला देश के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए सत्य सामने आने से पहले अफवाहों से बचना सभी की जिम्मेदारी है।






