India Athletics: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स में अपनी पहचान बनाने वाले रोहित यादव आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। कभी आर्थिक तंगी के कारण झोपड़ी में रहने वाले और भाला खरीदने तक के पैसे न होने पर बांस के डंडे से अभ्यास करने वाले रोहित अब भारत के नंबर-1 और दुनिया के इस सीजन के नंबर-2 जेवलिन थ्रोअर बन गए हैं। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इरादों और कड़ी मेहनत के सामने कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती।
जौनपुर के अदारी डभिया गांव के रहने वाले रोहित यादव ने भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में आयोजित 65वीं नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए 87.05 मीटर का थ्रो किया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि भारत के शीर्ष जेवलिन थ्रोअर बनने का गौरव भी हासिल किया। यही नहीं, इस दूरी के दम पर वह मौजूदा सीजन में दुनिया के दूसरे सर्वश्रेष्ठ भाला फेंक खिलाड़ी बन गए हैं।

रोहित से आगे केवल श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज हैं, जिन्होंने 92.62 मीटर का थ्रो किया है। शानदार प्रदर्शन के दम पर रोहित ने जापान में होने वाले एशियन गेम्स के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है, जिससे भारतीय खेल जगत को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं।
झोपड़ी में बीता बचपन, पिता ने बांस के डंडे से कराई प्रैक्टिस
रोहित यादव की सफलता के पीछे उनके परिवार का संघर्ष भी उतना ही बड़ा है। उनके पिता सभाजीत यादव ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी और पूरा परिवार झोपड़ी में रहता था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने तीनों बेटों—राहुल, रोहित और रोहन—को खेलों के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि उस समय भाला खरीदने तक के पैसे नहीं थे। ऐसे में बच्चों को बांस के डंडे से ही भाला फेंकने का अभ्यास कराया जाता था। रोहित ने महज 14 साल की उम्र से नियमित अभ्यास शुरू कर दिया था। रोज घंटों की मेहनत और परिवार के सहयोग ने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया।
आखिरी प्रयास में बदली किस्मत
भुवनेश्वर में आयोजित प्रतियोगिता में रोहित यादव की थ्रो सीरीज रही—77.71 मीटर, 77.63 मीटर, नो मार्क, 77.51 मीटर, 79.40 मीटर और आखिरी प्रयास में 87.05 मीटर। अंतिम थ्रो ने उन्हें प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक और विश्व रैंकिंग में बड़ी छलांग दिलाई।
अपनी जीत के बाद रोहित ने कहा कि अंतिम प्रयास में उन्हें सही लय (Rhythm) मिल गई थी, जिसकी वजह से वह 87.05 मीटर का शानदार थ्रो कर सके। उन्होंने कहा कि लंबे समय से वह इसी प्रदर्शन का इंतजार कर रहे थे और अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए पदक जीतना है।
युवाओं के लिए मिसाल बने रोहित
रोहित यादव की कहानी केवल एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है। बिना आधुनिक सुविधाओं के, केवल परिवार के सहयोग और अपनी लगन के दम पर उन्होंने यह साबित कर दिया कि सपनों को पूरा करने के लिए परिस्थितियां नहीं, बल्कि मजबूत इरादे जरूरी होते हैं। आज उनका सफर देशभर के उन युवाओं को प्रेरित कर रहा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।






