EL NINO EFFECT: खरीफ सीजन की चुनौतियों के बाद अब सरकार ने रबी सीजन 2026-27 की तैयारियां तेज कर दी हैं। बदलते मौसम और अल-नीनो के प्रभाव से कम बारिश वाले इलाकों में रबी फसलों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी को लेकर सोमवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 की शुरुआत हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से पानी की उपलब्धता के आधार पर फसल योजना तैयार करने को कहा।
शिवराज ने दिया ‘जल बजट’ का फॉर्मूला

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रबी की बुवाई से पहले हर राज्य और जिले को यह आकलन करना चाहिए कि सिंचाई के लिए कितना पानी उपलब्ध है। जहां पानी की कमी है, वहां कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता देने की जरूरत है। उन्होंने पानी की उपलब्धता के आधार पर फसल चयन को रबी रणनीति का अहम हिस्सा बताया। कम पानी वाले क्षेत्रों में दलहन और तिलहन जैसी फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
रेनफेड इलाकों के लिए चुनौती
केंद्रीय कृषि सचिव अतिश चंद्रा ने कहा कि इस साल खरीफ सीजन कई क्षेत्रों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। खासकर वर्षा पर निर्भर इलाकों में पहले बुवाई और बाद में फसल बचाने की चुनौती सामने आई। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाला रबी सीजन भी रेनफेड यानी बारिश पर निर्भर क्षेत्रों के लिए मुश्किल हो सकता है और इसका असर उत्पादन पर पड़ सकता है।
कर्नाटक और महाराष्ट्र में जाएगी केंद्र की टीम
सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार कर्नाटक और महाराष्ट्र में केंद्रीय टीमें भेजेगी। कृषि मंत्री के मुताबिक कर्नाटक में केंद्रीय टीम 3 अक्टूबर को भेजी जाएगी, जबकि महाराष्ट्र में भी टीम स्थिति का जायजा लेगी। दोनों राज्यों के बड़े हिस्सों में सूखे की स्थिति की जानकारी दी गई है।
अल-नीनो पर भी सरकार की नजर
सम्मेलन में रबी सीजन पर अल-नीनो और बारिश में संभावित कमी के असर पर चर्चा हुई। सरकार का फोकस पानी की उपलब्धता, फसल चयन, समय पर बुवाई, बीज और खाद की उपलब्धता तथा किसानों के लिए बेहतर कृषि योजना पर है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक रबी सीजन में अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति के अनुसार रणनीति तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत सिंचित और बारिश पर निर्भर क्षेत्रों के लिए अलग-अलग योजनाएं बनाने की बात कही गई है।
दलहन-तिलहन की खेती पर जोर
कम पानी वाले इलाकों में दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने की योजना है। सरकार का जोर इस बात पर है कि उपलब्ध पानी के हिसाब से ही फसल का चुनाव किया जाए, ताकि पानी की कमी के कारण किसानों को फसल नुकसान का सामना कम करना पड़े।
किसानों के लिए क्या मायने?
रबी की बुवाई अक्टूबर से शुरू होती है। ऐसे में जिन इलाकों में बारिश और जल उपलब्धता कम है, वहां किसानों के लिए फसल का चुनाव, बुवाई का समय और सिंचाई की योजना महत्वपूर्ण होगी। केंद्र और राज्य सरकारें मौसम और पानी की स्थिति के आधार पर जिला स्तर पर कृषि योजनाओं को तैयार करने पर जोर दे रही हैं।






