बकरा किश्तों पर… और जनता Petrol Pump पर!

NFA@0298
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दूरदर्शन और वीडियो कैसेट रिकॉर्डर के सुनहरे दिनों की बात है। तब एक कॉमेडी शो के कैसेट बहुत लोकप्रिय हुआ करते थे – ‘बकरा किश्तों पर’। बकरा ईद के बैकड्रॉप पर आधारित यह एक तगड़ा सामाजिक व्यंग्य था। कहानी एक ऐसे मध्यमवर्गीय परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके पास ईद पर कुर्बानी के लिए बकरा खरीदने के पैसे नहीं होते। समाज में अपनी नाक बचाने और दिखावे के लिए वे किश्तों पर एक बकरा खरीदकर लाते हैं। इसके बाद जो सिचुएशनल कॉमेडी और ड्रामा पैदा होता है, वह दर्शकों को लोटपोट कर देता है।

लेकिन अब भारत सरकार वैसी ही सिचुएशनल कॉमेडी और ड्रामा करोड़ों लोगों के लिए क्रिएट कर रही है। 15 मई से 25 मई तक पेट्रोल-डीजल के दाम चार बार बढ़ चुके हैं। अभी तक कुल मिलाकर करीब साढ़े सात रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। सरकार और तेल कंपनियां किश्तों में दाम बढ़ा रही हैं, ताकि जनता को एक साथ बड़ा झटका न लगे।

सरकार ने जनता को बकरा समझ रखा है। वास्तव में यहां ‘बकरा किश्तों पर’ कट रहा है। यह कोई कॉमेडी सीरियल नहीं, कड़वी सच्चाई है। सरकार के लिए जनता बकरा ही तो है! बकरे को तो मरना ही है — झटका हो या हलाल!

अंदाज़ा था कि पेट्रोल-डीजल के दाम 18 से 25 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं। अभी तक पेट्रोल और डीजल दोनों में साढ़े सात रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है, जो स्थानीय टैक्स जुड़ने के बाद कई जगह और ज्यादा हो जाती है। सरकार कह रही है कि पेट्रोलियम कंपनियां भारी घाटे में हैं। कारण बताया जा रहा है कि कच्चा तेल बहुत महंगा हो गया है और उसके दाम बेहद अस्थिर हैं।

क्रूड ऑयल के दाम फरवरी 2026 के अंत से अस्थिर हो गए। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले शुरू किए। इसके तुरंत बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ प्रभावी रूप से बंद हो गया, जो दुनिया के 20% से ज्यादा तेल निर्यात का रास्ता है। इसके बाद ईरान, सऊदी अरब, यूएई, इराक आदि में तेल उत्पादन प्रभावित हुआ या घट गया। ऑयल टैंकर ट्रैफिक भी रुक गया।

हमलों के बाद मार्च में क्रूड ऑयल के दाम में तेज उछाल आया। भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए और पीक पर 119-138 डॉलर तक चले गए। अप्रैल 2026 में औसत कीमत करीब 117 डॉलर रही, फिर कुछ राहत के साथ उतार-चढ़ाव जारी रहा।

ब्रेंट क्रूड कच्चे तेल की एक प्रमुख श्रेणी है, जिसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों के सबसे महत्वपूर्ण “बेंचमार्क” के रूप में किया जाता है। दुनिया भर में होने वाले कुल तेल व्यापार के लगभग 80% हिस्से का मूल्य इसी आधार पर तय होता है। भारत भी मूल रूप से इसी आधार पर कच्चा तेल खरीदता है। 27 मई 2026 को इसके दाम 99.25 से 99.56 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहे। उतार-चढ़ाव अभी भी जारी है।

भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम अप्रैल 2022 से 14 मई 2026 तक लगभग स्थिर रहे। (मार्च 2024 में पेट्रोल और डीजल के दाम में लगभग 2 रुपये की कमी की गई थी।) अप्रैल 2022 के बाद कीमतें लगभग फ्रीज रहीं, जबकि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें लगातार ऊपर-नीचे होती रहीं।

मार्च 2026 से शुरू हुई वैश्विक उथल-पुथल के बाद भी भारत में दाम नहीं बढ़ाए गए, क्योंकि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव थे। मतदान का आखिरी दिन 29 अप्रैल था। तब आशंका थी कि मतदान खत्म होते ही दाम बढ़ जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऑयल कंपनियां लगातार कहती रहीं कि दाम बढ़ाने जरूरी हैं। चुनाव परिणाम 4 मई को आ गए, लेकिन तब भी कीमतें नहीं बढ़ाईं गईं। हालांकि माहौल बनाया गया कि ऑयल कंपनियां भारी घाटे में हैं और उन्हें रोजाना एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो रहा है।

जनता को पहला झटका 15 मई को दिया गया — सीधे 3 रुपये दाम बढ़ाकर। फिर चार दिन बाद 19 मई को 87 से 91 पैसे तक बढ़ाए गए। फिर चार दिन बाद पिछली बढ़ोतरी दोहरा दी गई। इसके बाद दो दिन बाद करीब पौने तीन रुपये का एक और बड़ा झटका दिया गया।

चार झटकों में पेट्रोल करीब साढ़े सात रुपये और डीजल करीब पौने आठ रुपये महंगा हो गया। आज दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये लीटर, मुंबई में 111.21 रुपये लीटर और कोलकाता में 113.51 रुपये लीटर है। हर शहर में टैक्स के कारण कीमतें अलग-अलग हैं। यही स्थिति डीजल की भी है।

2012-14 में भी पेट्रोल-डीजल के दाम में भारी वृद्धि हुई थी। तीखी आलोचनाओं के बाद डायनामिक प्राइसिंग शुरू की गई थी। सब्जी-भाजी या आलू-प्याज़ की तरह पेट्रोल-डीजल के दाम रोज बदलने लगे। कीमतें रोज सुबह 6 बजे बदल जाती थीं। दुनिया में क्रूड ऑयल के दाम बदलते रहे और भारत में भी पेट्रोल-डीजल ऊपर-नीचे होता रहा — ऊपर ज्यादा, नीचे कम।

अब अचरज मत कीजिएगा अगर पेट्रोल-डीजल के दाम अचानक 10 या 15 रुपये और बढ़ जाएं। बढ़ेंगे। फिर उसका जोरदार विरोध होगा। उसके बाद सरकार बढ़ी हुई कीमतों में थोड़ा-सा कटौती कर देगी। जैसे 15 रुपये बढ़ाकर 2 रुपये कम कर दिए जाएं। फिर देशभर में ‘जनता’ — यानी भारतीय जनता पार्टी की जनता — धन्यवाद रैलियां निकालेगी। आभार सभाएं होंगी। प्रस्ताव पास होंगे कि देखिए, दुनिया भरमें दाम बढ़ रहे हैं, लेकिन भारत में दाम घट रहे हैं!

जब हलाल होता हुआ बकरा ज्यादा मिमियाता है, तब उसे सहलाया भी जाता है — ‘चिल्ला मत बेटा!’

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