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बच्चों के अपहरण और तस्करी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब; PIL में सख्त कानून और स्पेशल कोर्ट की मांग

By NS
On: September 10, 2026 9:37 PM
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नई दिल्ली। SupremeCourt: बच्चों के बढ़ते अपहरण और मानव तस्करी के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जनहित याचिका में बच्चों के अपहरण और तस्करी से जुड़े मामलों की जांच में तेजी लाने, सख्त कानूनी प्रावधान करने और मामलों की जल्द सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने की मांग की गई है।

यह जनहित याचिका अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि बच्चों के अपहरण और तस्करी के पीछे कई जगह संगठित नेटवर्क सक्रिय हैं। ऐसे मामलों में मौजूदा जांच और न्यायिक प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने की जरूरत है, ताकि अपहृत बच्चों को जल्द बरामद किया जा सके और आरोपियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई हो।

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बच्चों को अलग-अलग गैरकानूनी गतिविधियों में धकेलने का आरोप

याचिका में दावा किया गया है कि बच्चों के अपहरण के पीछे कई तरह के संगठित गिरोह और नेटवर्क काम कर रहे हैं। इनमें गैर-कानूनी गोद लेने के रैकेट, इंटरस्टेट चाइल्ड ट्रैफिकिंग नेटवर्क और बच्चों के शोषण से जुड़े गिरोह शामिल होने का आरोप लगाया गया है।

याचिका के मुताबिक, कुछ मामलों में बच्चों को भीख मांगने, बाल मजदूरी, वेश्यावृत्ति और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में धकेले जाने की बात सामने आती है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि बच्चों को अंगों की अवैध तस्करी और मेडिकल ट्रायल जैसे गंभीर गैरकानूनी कामों के लिए भी अगवा किए जाने के मामले सामने आते हैं।

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पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल

PIL में बच्चों के लापता होने और अपहरण से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि कई मामलों में लापता या अगवा किए गए बच्चों की FIR तुरंत दर्ज नहीं की जाती, जिससे जांच शुरू होने में देरी होती है।

याचिकाकर्ता के मुताबिक, शुरुआती समय में जांच तेजी से शुरू होना बेहद महत्वपूर्ण है। जांच में देरी और ट्रायल लंबे समय तक चलने की स्थिति में संगठित अपहरण और तस्करी से जुड़े गिरोहों को फायदा मिल सकता है। इसी वजह से ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई और समयबद्ध जांच की व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

ACP या SHO स्तर के अधिकारी से जांच की मांग

याचिका में बच्चों के अपहरण के मामलों की जांच के लिए विशेष व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत ऐसे मामलों की जांच ACP या SHO स्तर के अधिकारी से कराने की मांग की गई है।

इसके अलावा याचिका में अपहरण के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन की मांग की गई है। प्रस्ताव के मुताबिक, ऐसे मामलों का एक साल के भीतर फैसला सुनिश्चित करने के लिए MLA-MP कोर्ट की तर्ज पर स्पेशल कोर्ट बनाए जाएं।

आरोपियों की संपत्ति जब्त करने की भी मांग

PIL में अपहरण और तस्करी के मामलों में आरोपियों के खिलाफ सख्त आर्थिक कार्रवाई की मांग भी की गई है। याचिका में कहा गया है कि कानून में ऐसे प्रावधान किए जाने चाहिए, जिनके तहत अपहरण और तस्करी में शामिल आरोपियों की संपत्ति जब्त करने जैसी कार्रवाई की जा सके।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि केवल गिरफ्तारी और मुकदमे की प्रक्रिया पर्याप्त नहीं है, बल्कि संगठित गिरोहों के आर्थिक नेटवर्क पर भी प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

बिहार में बच्चों के लापता होने के आंकड़ों का हवाला

याचिका में 1 जून 2026 तक के आंकड़ों का हवाला देते हुए बिहार में बच्चों के लापता होने की स्थिति का भी जिक्र किया गया है। याचिका के मुताबिक, साल 2013 से बिहार में हर साल करीब 15 हजार मिसिंग केस दर्ज होते हैं। इनमें बड़ी संख्या बच्चों से जुड़े मामलों की होने का दावा किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि इन मामलों में मुश्किल से करीब 50 फीसदी बच्चे ही बरामद हो पाते हैं। इन आंकड़ों का हवाला देते हुए बच्चों की तलाश और बरामदगी के लिए मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई गई है।

मानव तस्करी को लेकर NCRB के आंकड़ों का हवाला

PIL में NCRB के आंकड़ों का हवाला देते हुए मानव तस्करी के मामलों पर भी चिंता जताई गई है। याचिका के मुताबिक, ओडिशा, बिहार, तेलंगाना और महाराष्ट्र में मानव तस्करी के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं।

याचिका में नाबालिग लड़कों की तस्करी के मामलों में ओडिशा को सबसे आगे बताया गया है, जबकि उसके बाद बिहार का नंबर बताया गया है। वहीं नाबालिग लड़कियों की तस्करी के मामलों में राजस्थान को सबसे आगे बताया गया है।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का भी दिया उदाहरण

याचिका में 5 जून 2026 को दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का भी उदाहरण दिया गया है। इसके मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने एक कथित गिरोह के 13 लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार यह नेटवर्क दिल्ली के अलावा हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात समेत पांच राज्यों में सक्रिय था।

पुलिस के मुताबिक, गिरोह कथित तौर पर EWS और BPL परिवारों से नवजात बच्चों का अपहरण करता था और उन्हें गैरकानूनी गतिविधियों के लिए 8 से 10 लाख रुपये तक में बेचता था। याचिका में इस मामले को बच्चों के अपहरण और तस्करी के संगठित नेटवर्क की गंभीरता के उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है।

अब केंद्र और राज्यों के जवाब पर नजर

बच्चों के अपहरण और तस्करी से जुड़े मामलों में दाखिल इस PIL पर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों के जवाब पर नजर रहेगी। याचिका में जिन सुधारों की मांग की गई है, उनमें तेज FIR, समयबद्ध जांच, वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी, स्पेशल कोर्ट और सख्त कार्रवाई जैसे प्रमुख मुद्दे शामिल हैं।

बच्चों के अपहरण और तस्करी जैसे मामलों में शुरुआती कार्रवाई को बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से इस पूरी व्यवस्था को लेकर आगे महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आने की उम्मीद है।



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