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किल्लेश्वर महादेव स्वयंभू शिवलिंग जहां पूरी होती है भक्तों की मनोकामना , दर्शन करने सावन के महीने में श्रद्धालुओं का लगा रहता है तांता, दर्शन मात्र से हो जाते सभी कार्य सफल

By NS
On: August 3, 2026 3:54 AM
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पाटन। विकासखंड मुख्यालय से 7 किलोमीटर दूर पर व खारुन नदी के किनारे पर बसा हुआ गांव तरीघाट है जो कि पर हजारों साल के इतिहास को संजोए हुए है, वहीं सैंकड़ों वर्षों से है पुरातात्विक धरोहर मौजूदगी, जहां पर कल्चूरी वंशज के इष्द देवी प्राचीन मां महामाया मां का मंदिर पूर्व में जिनका सैकड़ों साल पहले मंदिर का निर्माण कराया गया था, जिसके साक्ष्य आज भी है मौजूद,जिसके सामने पर है किल्लेश्वर स्वयंभू शिवलिंग जिसके बारे में बुजुर्ग या व तरीघाट के ग्रामीण बताते हैं कि यह शिवलिंग स्वयंभू है हजारों साल से यहां पर स्थित है,जो लोगों के दर्शन मात्र से मनोकामना को पूरा कर देते है ,यहां पर दर्शन के लिए सावन के महीने में भक्तो की भीड़ जुटती है, और लोग अपनी आस्था के रूप में भगवान को नमन करते हैं, मंदिर के पुजारी दीपक बन गोस्वामी ने बताया कि मंदिर का निर्माण कल्चूरी वंशज के राजा जगत पाल के द्वारा कराया गया था है जब एक रात भगवान भोलेनाथ उनके सपनों में आए ‍व जगह के बारे मे बताया जब राजा जगत पाल वहां गये तब ,उन्हें पता चला कि यहां पर एक शिवलिंग है, भगवान भोलेनाथ का आकार धीरे धीरे बढ़ रहा है जिसके बाद वहां मंदिर का निर्माण कराया गया, गांव वाले बताते हैं कि वर्तमान में पूर्व में मंदिर का आकार सिमित हुआ करता था अभी वर्तमान में लोगों के आस्था को देखते हुए गांव के ही देवेंद्र सिन्हा ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और विशालकाय मंदिर बनवाया,

दर्शन मात्र से कष्ट होते हैं दूर , समस्याओं को हर लेते हैं भोलेनाथ

तरीघाट स्थित प्राचीन महामाया मंदिर प्रांगण में मंदिर के सामने एक विशाल का स्वयंवर शिवलिंग का मंदिर है जहां पर भक्तों के दर्शन मात्र से कष्ट दूर हो जाते हैं वहां के पुजारी दीपक पर गोस्वामी बताते हैं कि जो भी भक्त अपनी समस्या या किसी परेशानी को लेकर भगवान भोलेनाथ के सामने आते हैं सच्चे मन से श्रद्धा के साथ हुए भगवान से अर्जी विनती करते हैं तो उनकी हर मुराद को भगवान भोलेनाथ पूरा कर देते है

बारह महीना श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने पहुंचते हैं वही सावन के महीने में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है

तरीघाट में किल्लेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध स्वयंभू शिवलिंग जो की आम मंदिर की तरह ही है परंतु मंदिर की विशेषता यह कि यहां पर आने वाले भक्तों की हर मुराद या हर मनोकामना पूरी हो जाती है इसीलिए दूर-दूर से श्रद्धालु गन बारह महीने या दर्शन करने आते हैं परंतु सावन के महीने में विशेष पूजा की जाती है जिसके चलते यहां श्रद्धालुओं की भीड़ सैकड़ो की संख्या में एकत्र होती है और भगवान की दर्शन पक्ष हुए अपने गंतव्य स्थान जाते हैं

सैकड़ों वर्ष पूर्व में राजा जगतपाल के द्वारा मंदिर का निर्माण कराया गया था ,

तरीघाट गांव खारून नदी के तट पर बसा हुआ है जहां वे अपने अंदर हजारों वर्ष पूर्व की ऐतिहासिक , साक्ष्य को संजोए हुए वे आज भी मौजूद है मां महामाया मंदिर जो कल्चुरी वंशजो के इष्द देवी के रूप में विराजमान है ,जहां लोग दर्शन करने पहुंचते हैं वहीं उनके सामने में ही स्वयंभू शिवलिंग है को जिसे किल्लेश्वरि महादेव के नाम से भी जाना जाता है उनका निर्माण सबसे पहले राजा जगतपाल के द्वारा कराया गया था परंतु समय के साथ वह मंदिर पुराना हो गया था इसी के चलते वर्तमान में गांव के ही देवेंद्र सिन्हा के द्वारा इस साल मंदिर का नव निर्माण कराया गया , जहां भक्त आसानी से भगवान का दर्शन कर अपनी श्रद्धा के अनुसार अर्जी विनती करते हैं।



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