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करका के जंगल में कटाई-अतिक्रमण का बड़ा खुलासा 10 साल में 30 हजार पेड़ कटने का प्रारंभिक अनुमान, 35 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण; 1100 से ज्यादा पेड़ों पर गडलिंग के निशान, ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों में भी वन क्षरण के संकेत

By NS
On: September 23, 2026 12:04 PM
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धमतरी, 23 सितंबर 2026। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के करका क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वनभूमि अतिक्रमण और जंगल कटाई का मामला सामने आया है। वन विभाग के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक वर्ष 2016 से 2026 के बीच क्षेत्र में करीब 30 हजार पेड़-पौधे काटे गए हैं। वहीं GPS आधारित वर्तमान आकलन में करीब 35 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण सामने आया है। हालांकि अतिक्रमण की अंतिम सीमा DGPS ड्रोन मैपिंग पूरी होने के बाद तय की जाएगी।

सितंबर की जांच में मिले कटाई के सबूत

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22 सितंबर को किए गए मैदानी निरीक्षण में वन विभाग की टीम को 1100 से अधिक पेड़ों पर गडलिंग के निशान और बड़ी संख्या में ताजा कटे पेड़ों के ठूंठ मिले। विभाग ने अतिक्रमण की वास्तविक सीमा और वन विनाश की स्थिति दर्ज करने के लिए GPS/DGPS, ड्रोन इमेजरी और अन्य डिजिटल साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों से भी वन क्षरण के संकेत

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USTR ने क्षेत्र की ऐतिहासिक वन स्थिति का आकलन करने के लिए ISRO की सैटेलाइट इमेजरी का अध्ययन किया। 2006 और 2012 की तस्वीरों में क्षेत्र में घना वन दिखाई देता है, जबकि करीब 2017 से वन क्षेत्र के धीरे-धीरे खुले क्षेत्र में बदलने के संकेत मिले हैं। बाद की तस्वीरों में भी वन क्षरण जारी दिखाई देने की बात विभाग ने कही है। इसी आधार पर 2016 से 2026 के बीच करीब 30 हजार पेड़-पौधे हटाए जाने का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है।

मुआवजा लेकर विस्थापित हुआ था करका गांव

विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार करका पहले वन ग्राम था और सोंढूर बांध के कैचमेंट क्षेत्र में स्थित था। बांध निर्माण के बाद 1980 के दशक में गांव का विस्थापन किया गया। रिकॉर्ड के मुताबिक गांव के 55 लोगों को जल संसाधन विभाग द्वारा मुआवजा दिया गया था। इसके बावजूद बाद में ऊंचाई वाले वन क्षेत्र में दोबारा अतिक्रमण और कटाई की गतिविधियां सामने आने की बात वन विभाग ने कही है।

2016 में भी दर्ज हुआ था वन अपराध का मामला

करका से जुड़े 22 लोगों के खिलाफ वर्ष 2016 में POR क्रमांक 7922 के तहत करीब 22 हेक्टेयर घने वन क्षेत्र में कथित अतिक्रमण को लेकर मामला दर्ज किया गया था। वर्ष 2023 में JMFC, नगरी की अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। वन विभाग का कहना है कि इसके बाद भी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में अतिक्रमण जारी रहा और उसका विस्तार हुआ।

निरीक्षण टीम को रोकने का आरोप, नया POR दर्ज

22 सितंबर को USTR के उप निदेशक के नेतृत्व में करीब 20-25 वन अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम अतिक्रमित क्षेत्र का निरीक्षण कर रही थी। इस दौरान विभाग ने करका निवासी मुकेश मरकाम से कथित अतिक्रमित वनभूमि में चल रही खेती को लेकर पूछताछ की। विभाग की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इसके बाद करीब 50-60 लोगों ने सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से कथित रूप से रोका और मुकेश मरकाम को मौके से ले गए। घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई है।

घटना के बाद खल्लारी थाने में FIR दर्ज कराने के लिए वीडियो साक्ष्य के साथ लिखित आवेदन देने की प्रक्रिया शुरू की गई। वहीं उप निदेशक USTR के हस्तक्षेप के बाद POR क्रमांक 20/17, दिनांक 23 सितंबर 2026 को मुकेश मरकाम, केशनाथ उर्फ गोलू और अन्य के विरुद्ध कथित वन अपराध के संबंध में दर्ज किया गया है।

हाथी कॉरिडोर और वन्यजीव आवास को लेकर चिंता

करका क्षेत्र केवल सामान्य वनभूमि नहीं बल्कि महत्वपूर्ण वन्यजीव आवास और हाथियों के आवागमन वाले परिदृश्य का हिस्सा बताया गया है। विभाग के अनुसार लगातार पेड़ों की कटाई, गडलिंग और वनभूमि को कृषि क्षेत्र में बदलने से वन्यजीव आवास का विखंडन हो सकता है और पारंपरिक वन्यजीव मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। इससे आसपास के गांवों में मानव-हाथी सहित मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना बढ़ सकती है।

1050 हेक्टेयर अतिक्रमित वनभूमि मुक्त कराने का दावा

USTR प्रशासन के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में करीब 1,050 हेक्टेयर अतिक्रमित वन क्षेत्र को मुक्त कराया गया है। इसके लिए ड्रोन निगरानी, ISRO सैटेलाइट इमेजरी, GPS/DGPS आधारित सत्यापन, डिजिटल साक्ष्य, स्वतंत्र गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों का उपयोग किया जा रहा है।

वहीं रिजर्व में करीब 65 प्रतिशत फील्ड स्टाफ के पद रिक्त होने के बावजूद वन संरक्षण अभियान जारी है। विभाग के अनुसार पिछले चार वर्षों में वन एवं वन्यजीव संरक्षण कार्य में तैनात टीमों पर पांच गंभीर हमले भी हो चुके हैं। इसके बावजूद फ्रंटलाइन वनकर्मी संरक्षित क्षेत्र के जंगलों और वन्यजीव आवास की सुरक्षा में जुटे हैं।



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