
रायपुर। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के कोसला गांव में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के जनचौपाल कार्यक्रम में इलाके की कांग्रेस पार्टी की विधायक शेषराज हरवंश (Sheshraj Harvansh) को अफसरों ने घुसने नहीं दिया। विधायक अफसरों के रवैए पर भड़की हुई हैं।
उल्लेखनीय है कि इन दिनों छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री प्रदेश भर का दौरा कर रहे हैं। वे लोगों से मिल रहे हैं, उनकी समस्याएं जान रहे हैं।
शनिवार को मुख्यमंत्री जब कोसला गांव पहुंचे तब उस इलाके की ही विधायक शेषराज हरवंश भी लोगों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने के लिए पहुंची।

शेषराज हरवंश के मुताबिक उन्हें कलेक्टर और एसपी ने उनके ही विधानसभा क्षेत्र में हो रहे इस जन चौपाल में यह कहते हुए घुसने से रोक दिया कि आप जाएंगी तो हमारे लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी।
कांग्रेस विधायक ने जिला प्रशासन पर जानबूझकर अपमान करने और लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगाया है।
विधायक शेषराज हरवंश ने द लेंस से बात करते हुए कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता की विभिन्न समस्याओं को सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के उद्देश्य से कोसला गांव में आयोजित जनचौपाल कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं लेकिन मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से ठीक पहले उनके पास जिला कलेक्टर जन्मेजय महोबे और पुलिस अधीक्षक निवेदिता पाल के फोन आए।
उन्होंने कहा, ‘अधिकारियों ने मुझसे साफ-साफ कहा कि यह मुख्यमंत्री जी का गोपनीय कार्यक्रम है। आपका यहां रहना उचित नहीं होगा। यदि आप रहीं तो हमारे लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।’
विधायक ने इस व्यवहार को बेहद आहत करने वाला और शर्मनाक बताते हुए कहा कि एक निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के साथ जिला प्रशासन का यह रवैया अक्षम्य है।
विधायक के सवाल
उन्होंने इस पूरे प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन पर सवाल दागे हैं।
उन्होंने पूछा कि क्या यह कार्रवाई मुख्यमंत्री जी के सीधे आदेश पर हुई है या जिला प्रशासन ने चाटुकारिता दिखाते हुए अपनी मर्जी से यह कदम उठाया?
अगर कार्यक्रम गोपनीय था तो भाजपा के स्थानीय नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में वहां कैसे मौजूद थे? क्या जनचौपाल अब केवल सत्ताधारी दल का निजी कार्यक्रम बन गया है?
क्या छत्तीसगढ़ में विपक्ष के चुने हुए जनप्रतिनिधियों के साथ अपमानजनक व्यवहार की नई परंपरा शुरू की जा रही है?
लोकतंत्र और महिला प्रतिनिधित्व पर सवाल
शेषराज हरवंश ने इस घटना को पामगढ़ की जनता का भी अपमान बताया। उन्होंने कहा कि जनता द्वारा भारी मतों से चुनी गई अपनी प्रतिनिधि के साथ ऐसा दुर्व्यवहार न सिर्फ व्यक्तिगत अपमान है, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक मूल्यों और महिला सशक्तिकरण पर सीधा प्रहार है।
विधायक ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मांग की है कि इस शर्मनाक घटना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अभी तक सत्ताधारी भाजपा या जिला प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन राजनीतिक हलकों में इस घटना की चर्चा है।


