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Rupee vs Dollar: रुपया 97 के पार गया तो बढ़ सकती है मुश्किल?

By NS
On: October 1, 2026 5:07 PM
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नई दिल्ली। Rupee vs Dollar: भारतीय रुपये पर एक बार फिर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। ग्लोबल तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और महंगे कच्चे तेल के चलते डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर करीब 96 के स्तर तक पहुंच गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौजूदा दबाव जारी रहा तो रुपया आगे 97 के स्तर तक फिसल सकता है।

कोटक सिक्योरिटीज के करेंसी, कमोडिटी और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, 97 का स्तर रुपये के लिए अहम हो सकता है। अगर यह स्तर भी टूटता है तो रुपया 99 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। उनके मुताबिक ऐसी स्थिति में बाजार पर दबाव बढ़ने के साथ महंगाई का असर भी देखने को मिल सकता है।

क्यों कमजोर हो रहा है रुपया?

रुपये पर एक साथ कई कारणों से दबाव बना हुआ है। विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार से निकासी बढ़ी है, वहीं आयात महंगा होने से डॉलर की मांग भी बढ़ रही है। इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड ऊंची रहने से भी उभरते बाजारों की करेंसी पर दबाव बना हुआ है।

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अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति अभी भी मजबूत है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां रुपये के लिए चुनौती पैदा कर रही हैं।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाई चिंता

रुपये की कमजोरी के पीछे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली को भी अहम वजह माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर की शुरुआत तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 6.1 अरब डॉलर की निकासी की है। विशेषज्ञ के अनुसार, पिछले दो महीनों में आया लगभग 90 फीसदी विदेशी निवेश वापस बाहर जा चुका है।

FCNR(B) के जरिए विदेशी मुद्रा आने से रुपये को कुछ समर्थन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा सीधे बाजार में आने के बजाय RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में चला गया। ऐसे में अगर रुपये पर दबाव और बढ़ता है तो बाजार में RBI के हस्तक्षेप की संभावना बढ़ सकती है।

कच्चे तेल की कीमतों से भी बढ़ी चिंता

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग पर असर पड़ता है। विशेषज्ञ के मुताबिक ब्रेंट क्रूड के वायदा भाव के साथ स्पॉट क्रूड, फ्रेट और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है।

RBI के रुख पर भी बाजार की नजर

अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, आने वाले समय में RBI की मौद्रिक नीति भी महत्वपूर्ण हो सकती है। उनका अनुमान है कि केंद्रीय बैंक महंगाई के दबाव को देखते हुए रेपो रेट में बढ़ोतरी पर विचार कर सकता है। हालांकि, वास्तविक फैसला RBI की नीति समिति के आकलन और उस समय उपलब्ध आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल रुपये के लिए 97 का स्तर बाजार में चर्चा का प्रमुख बिंदु बना हुआ है। यदि वैश्विक दबाव कम नहीं होता और डॉलर की मांग मजबूत रहती है, तो आगे रुपये की चाल पर निवेशकों और रिजर्व बैंक दोनों की नजर रहेगी।



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