रायपुर। Vishwakarma Puja 2026: आज देशभर में भगवान विश्वकर्मा पूजा का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। भगवान विश्वकर्मा को हिंदू धर्म में सृष्टि के प्रथम वास्तुकार और शिल्पकार के रूप में माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उन्होंने देवताओं के लिए अनेक भव्य भवनों, नगरों और दिव्य वस्तुओं का निर्माण किया था। खासतौर पर मशीन, औजार, निर्माण कार्य, कारखाने और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से कार्यक्षेत्र में सफलता, सुख-समृद्धि और उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन लोग अपने प्रतिष्ठानों, कारखानों, दुकानों और कार्यस्थलों की साफ-सफाई कर मशीनों, औजारों और अन्य उपकरणों की पूजा करते हैं।

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त
आज भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लिए अलग-अलग समय को शुभ माना गया है।
- सुबह का शुभ मुहूर्त: सुबह 7:58 बजे से 10:43 बजे तक
- दोपहर का शुभ मुहूर्त: दोपहर 12:15 बजे से 1:48 बजे तक
- शाम का शुभ मुहूर्त: शाम 4:52 बजे से 6:24 बजे तक
इस समय पूजा करने से बचें
आज दोपहर 1:48 बजे से 3:20 बजे तक राहुकाल रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में शुभ और मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। इसलिए पूजा के लिए ऊपर दिए गए शुभ समय में से किसी एक समय का चयन किया जा सकता है।
कौन हैं भगवान विश्वकर्मा?
धार्मिक मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के दिव्य शिल्पकार और वास्तुकार के रूप में वर्णित किया गया है। मान्यता है कि उन्होंने द्वारका नगरी, स्वर्ग लोक, लंका और पुष्पक विमान जैसी अद्भुत रचनाओं का निर्माण किया था। इसी वजह से निर्माण, वास्तु, शिल्प और तकनीकी कार्यों से जुड़े लोगों के लिए भगवान विश्वकर्मा की पूजा का विशेष महत्व है।
विश्वकर्मा पूजा में क्या-क्या सामग्री चाहिए?
पूजा के लिए भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर, चौकी, लाल या पीला कपड़ा, रोली, चंदन, हल्दी, अक्षत यानी चावल, फूल, फल, मिठाई, नारियल, कलश, गंगाजल, कलावा, घी, धूप, दीप, कपूर, सुपारी, पान के पत्ते, लौंग और इलायची जैसी सामग्री रखी जा सकती है।
भगवान विश्वकर्मा की पूजा विधि
सबसे पहले सुबह स्नान आदि करने के बाद कार्यस्थल की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद गंगाजल का छिड़काव कर स्थान को पवित्र करें। पूजा के लिए चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
इसके बाद कलश स्थापित कर भगवान का ध्यान करें। कार्यस्थल पर मौजूद मशीनों, औजारों, उपकरणों और यंत्रों को भी साफ करके उनकी पूजा करें। इन पर रोली, चंदन और हल्दी लगाएं। धूप और दीप जलाकर भगवान विश्वकर्मा की आरती करें। अंत में फल, फूल और मिठाई का भोग लगाएं और प्रसाद लोगों में वितरित करें।
विश्वकर्मा पूजा का महत्व
विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन औजारों और मशीनों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी माना जाता है, जिनसे लोग अपने रोजगार और आजीविका से जुड़े काम करते हैं। इस दिन कई प्रतिष्ठानों और कारखानों में मशीनों की पूजा के साथ कर्मचारियों के लिए विशेष आयोजन भी किए जाते हैं।
भगवान विश्वकर्मा की आरती
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा।।
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।।
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई।।
रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर दूर दुःख कीना।।
जब रथकार दम्पति, तुम्हारी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी।।
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज, चतुर्भुज, दसभुज, सकल रूप साजे।।
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जाए, अटल शांति पावे।।
श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई जन गावे।
कहत गजानन्द स्वामी, सुख-संपत्ति पावे।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।







