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CG NEWS : भंगाराम माई के दरबार में लगी देवी-देवताओ

By NS
On: September 12, 2026 11:30 PM
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कोंडागांव। CG NEWS : कोंडागांव जिले के केशकाल में आदिम संस्कृति और आस्था से जुड़ी एक अनोखी परंपरा आज भी जीवंत है। यहां भादो जात्रा के दौरान भंगाराम माई के दरबार में इंसानों की नहीं, बल्कि देवी-देवताओं की अदालत लगती है। क्षेत्र के नौ परगना से देवी-देवता अंगा, डाग, डोली अपने पुजारी, सिरहा, गुनिया, मांझी ,चालकी और गायता-मुखिया के साथ दरबार में हाजिरी लगाते हैं। इस दौरान सालभर के कार्यों का लेखा-जोखा लिया जाता है और मान्यता के अनुसार जिन देवी-देवताओं से क्षेत्र में विघ्न-बाधा उत्पन्न होने की शिकायत होती है, उनके दोषों की समीक्षा कर सजा सुनाई जाती है।

केशकाल के तेलीन सती माई मंदिर के समीप और टाटामारी पर्यटन मार्ग पर स्थित भंगाराम देवी के दरबार में आयोजित भादो जात्रा में इस वर्ष भी नौ परगना के देवी-देवताओं की उपस्थिति रही। परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की मान्यताओं के आधार पर देवी-देवताओं के कार्यों की समीक्षा की गई। इस वर्ष 35 देवी-देवताओं को सजा सुनाए जाने की बात सामने आई है।

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*भंगाराम माई के दरबार में होता है फैसला*

 

स्थानीय मान्यता के अनुसार क्षेत्र के देवी-देवताओं के लिए भंगाराम माई के दरबार में अपनी हाजिरी देना आवश्यक माना जाता है। यदि किसी देवी-देवता के कारण गांव या क्षेत्र में लगातार विघ्न-बाधा उत्पन्न होने की शिकायत हो, तो भादो जात्रा के दौरान उनके संबंध में निर्णय लिया जाता है। इसे स्थानीय आदिम परंपरा में देवी-देवताओं की अदालत के रूप में देखा जाता है।

 

 

*भंगाराम देवी समिति के सचिव नंदलाल ने बताया* कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पूरे नौ परगना के देवी-देवता भादो जात्रा में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि गांव और क्षेत्र में विघ्न-बाधा उत्पन्न करने वाले 35 देवी-देवताओं को सजा सुनाई गई। जात्रा में हजारों लोगों की मौजूदगी रही।

 

*छह शनिवार तक होती है विशेष सेवा*

 

भंगाराम देवी की भादो जात्रा हर वर्ष भादो माह के कृष्ण पक्ष के शनिवार को आयोजित होने की परंपरा है। जात्रा से पहले लगातार छह शनिवार तक विशेष पूजा-अर्चना और सेवा की जाती है। इसके बाद सातवें और अंतिम शनिवार को भादो जात्रा का आयोजन होता है।

जात्रा के दिन नौ परगना के देवी-देवताओं के साथ उनके पुजारी, सिरहा, गुनिया, मांझी और गायता-मुखिया बड़ी संख्या में भंगाराम माई के दरबार में पहुंचते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार इस दरबार में हाजिरी लगाना देवी-देवताओं के लिए आवश्यक माना जाता है।

 

*पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होती है पूजा*

 

भादो जात्रा के दौरान भंगाराम माई और देवी-देवताओं की पूजा पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार की जाती है। फूल, पान-सुपारी सहित अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। स्थानीय परंपरा में मुर्गा और बकरा-बकरी की बलि दिए जाने की प्रथा भी बताई जाती है। वहीं जात्रा के दिन महिलाओं के दरबार में प्रवेश को लेकर भी स्थानीय परंपरा के तहत प्रतिबंध रहता है।

मान्यता यह भी है कि भंगाराम माई की अनुमति और मान्यता के बिना किसी नए देवी-देवता की पूजा शुरू नहीं की जाती।

 

*हजारों लोग बने अनोखी परंपरा के साक्षी*

 

भंगाराम माई की यह भादो जात्रा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि बस्तर की आदिम संस्कृति, लोक आस्था और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था का अनूठा उदाहरण मानी जाती है। इस अनोखी परंपरा को देखने और देवी-देवताओं का दरबार देखने के लिए केशकाल क्षेत्र के अलावा दूर-दराज के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पूरे आयोजन के दौरान क्षेत्र में आस्था और पारंपरिक संस्कृति का माहौल देखने को मिला।



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