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लद्दाख की बेटी ने रचा इतिहास, 14 साल घर से दूर रहकर

By NS
On: September 6, 2026 7:29 PM
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Kargil Girl Success Story: लद्दाख की जंस्कार घाटी की रहने वाली स्टैनजिन त्सांगयांग ने भारतीय सेना में अधिकारी बनकर नया इतिहास रच दिया है। 5 सितंबर 2026 को ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), चेन्नई से कमीशन हासिल करने के साथ ही वह कारगिल जिले से भारतीय सेना में अधिकारी बनने वाली पहली महिला बन गई हैं। उनकी इस उपलब्धि के बाद पूरे लद्दाख में खुशी और गर्व का माहौल है।

बर्फ से ढके पहाड़ों और बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले जंस्कार में पली-बढ़ी स्टैनजिन की कहानी सिर्फ सेना में शामिल होने की नहीं, बल्कि बचपन से देखे गए सपने को पूरा करने के लिए किए गए संघर्ष की भी है। पढ़ाई के लिए उन्होंने महज छोटी उम्र में अपना घर छोड़ दिया था और करीब 14 साल परिवार से दूर हॉस्टल में रहकर शिक्षा हासिल की।

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बचपन में छोड़ा घर, पढ़ाई को बनाया पहला लक्ष्य

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स्टैनजिन त्सांगयांग अपने परिवार की सबसे छोटी बेटियों में से हैं। बचपन से ही उनका सपना भारतीय सेना में अधिकारी बनने का था। इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने कम उम्र में अपना गांव छोड़ दिया।

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उन्होंने लेह स्थित लामडोन मॉडल स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी की। इस दौरान करीब 14 वर्षों तक वह परिवार से दूर हॉस्टल में रहीं। पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के चलते उन्हें आगे की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति भी मिली।

इसके बाद उन्होंने असम की तेजपुर यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।

परिवार में नहीं था सेना का कोई बैकग्राउंड

स्टैनजिन के लिए सेना में अधिकारी बनने का रास्ता आसान नहीं था। उनके परिवार या समुदाय में पहले से कोई सैन्य पृष्ठभूमि नहीं थी। कॉलेज के दौरान एनसीसी से जुड़ने के बाद उन्हें सेना में अधिकारी बनने के अलग-अलग अवसरों और प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी मिली।

उन्होंने 5 असम बटालियन एनसीसी में कैडेट के तौर पर प्रशिक्षण लिया। इसके बाद भारतीय सेना में अधिकारी बनने के अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ीं।

स्टैनजिन ने कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) परीक्षा पास की और इसके बाद एसएसबी इलाहाबाद की कठिन चयन प्रक्रिया को भी पार किया। कई चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। जंस्कार की कठिन परिस्थितियों में बचपन से मिली मजबूत इच्छाशक्ति और परिवार के भरोसे ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

5 सितंबर को हासिल किया बड़ा मुकाम

ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, चेन्नई में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद स्टैनजिन त्सांगयांग को 5 सितंबर 2026 को भारतीय सेना में कमीशन मिला। इसके साथ ही उन्होंने कारगिल जिले की पहली महिला सेना अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया।

उनकी उपलब्धि की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी उन्हें लगातार बधाइयां दी जा रही हैं। लद्दाख से लेकर असम तक लोग उनकी सफलता को गर्व का विषय बता रहे हैं।

तेजपुर यूनिवर्सिटी ने भी दी बधाई

स्टैनजिन की सफलता पर तेजपुर यूनिवर्सिटी ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं। यूनिवर्सिटी ने उन्हें अपनी पूर्व छात्रा और 5 असम बटालियन एनसीसी की पूर्व कैडेट बताते हुए उनकी उपलब्धि पर गर्व जताया।

यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया कि लद्दाख के जंस्कार की रहने वाली उनकी पूर्व छात्रा अब भारतीय सेना में कमीशन अधिकारी बन गई हैं। यह संस्थान के लिए भी गर्व का क्षण है।

लद्दाख बीजेपी ने बताया प्रेरणादायक उपलब्धि

स्टैनजिन त्सांगयांग की सफलता पर लद्दाख बीजेपी ने भी उन्हें बधाई दी। पार्टी की ओर से उनकी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उन्होंने स्कूल की पढ़ाई के लिए 14 साल परिवार से दूर रहकर संघर्ष किया, इसके बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और एनसीसी के जरिए सेना में जाने की दिशा में कदम बढ़ाया।

स्टैनजिन की कहानी खास इसलिए भी है क्योंकि बिना किसी सैन्य पारिवारिक पृष्ठभूमि के उन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर भारतीय सेना में अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। उनकी उपलब्धि लद्दाख और खासकर जंस्कार की बेटियों के लिए एक नई मिसाल के तौर पर देखी जा रही है।



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