Religious News: वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 4 अगस्त को पहला मंगला गौरी व्रत किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं का वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है और पति को लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधा दूर होती है और महादेव एवं मां पार्वती की कृपा से रिश्ते में मधुरता आती है। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि मंगला गौरी व्रत को क्या कुंवारी कन्याएं भी रख सकती हैं। आइए आपको बताते हैं कि क्या कुंवारी कन्याएं भी रख सकती हैं मंगला गौरी व्रत और इस व्रत से जुड़े नियम के बारे में।

क्या कुंवारी कन्याएं रख सकती है व्रत?
जिस तरह सुहागिन महिलाएं वैवाहिक जीवन में सुख-शांति के लिए मंगला गौरी व्रत को करती हैं, तो उसी तरह से कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए इस व्रत को कर सकती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से विवाह में आ रही बाधा दूर होती है और वैवाहिक जीवन सदैव खुशियों से भरा रहता है।
मंगला गौरी व्रत के नियम
1. मंगला गौरी व्रत के दौरान किसी से वाद-विवाद नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस तरह की गलती को करने से
2. व्रत का शुभ फल प्राप्त नहीं होता है और महादेव नाराज हो सकते हैं।
3. इसके अलावा इस दिन काले रंग के कपड़े धारण नहीं करने चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होती है।
4. सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद सच्चे मन से व्रत का संकल्प लें और पूजा-अर्चना करें।
5. इस दिन मंदिर या गरीब लोगों में विशेष चीजों का दान करना चाहिए। इससे शुभ फल प्राप्त होता है।
6. व्रत के दौरान क्रोध, झूठ और वाद-विवाद से पूरी तरह दूर रहें।
7. पूजा के दौरान कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे मां पार्वती के संग महादेव की कृपा प्राप्त होती है और मनचाहा वर प्राप्त होता है।
8. इस दिन मां पार्वती को कुमकुम, हल्दी, लाल फूल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करना चाहिए।
9. इसके अलावा मां पार्वती को 16 श्रृंगार का सामान (लाल चुनरी, चूड़ियां, मेहंदी आदि) चीजें अर्पित करनी चाहिए।






