--विज्ञापन यहां--

आरटीआई में हुआ बड़ा खुलासा हायर सेकेण्डरी परसदाकला में अजब गजब किस्से, व्याख्याता बने बाबू, बाबू खाली बैठ मख्खी मार रहे केमेस्ट्री के शिक्षक के पास 9 खातों का प्रभार, एक सत्र में 90 दिन मारी छुट्टी

By NS
On: July 29, 2026 7:28 AM
हमें फॉलो करें:
--विज्ञापन यहां--


खबर हेमंत तिवारी,,,,,,,,,,

राजिम/ फिंगेश्वर विकासखंड के शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल परसदाकला में शिक्षा विभाग का अजब-गजब कारनामा सामने आया है। यहां प्रमुख विषय पढ़ाने वाला शिक्षक बाबूगिरी कर रहा है और स्कूल में पदस्थ 3 बाबू सिर्फ हाजिरी लगाकर चले जाते हैं।                    आरटीआई से मिली जानकारी ने स्कूल की पूरी व्यवस्था की पोल खोल दी है। जानकारी के अनुसार सत्र 2025-26 में स्कूल में पदस्थ व्याख्याताओं और बाबुओं के कार्य विभाजन, खातों के प्रभार और अन्य जिम्मेदारियों में भारी अनियमितता बरती गई है। स्कूल में पदस्थ केमेस्ट्री विषय के व्याख्याता गिरवर यादव पिछले 2016 से ही एक ही प्रभार संभाल रहे हैं। उनके पास जनभागीदारी, समग्र शिक्षा, क्रीड़ा, स्काउट, रेडक्रास, भूगोल मद, विज्ञान निधि, विज्ञान क्लब सहित कुल 9 खातों की जिम्मेदारी है। इसके अलावा छात्रवृत्ति, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र बनवाना, आवक-जावक डाक, फाइलिंग और कैश बुक संधारण का काम भी उन्हीं के जिम्मे है। आरटीआई में संलग्न उपस्थिति पंजी से यह भी खुलासा हुआ कि स्काउट, आधार सीडिंग, जनगणना, ओपन परीक्षा में पर्यवेक्षक ड्यूटी के नाम पर एक ही सत्र में इस व्याख्याता शिक्षक ने 90 दिन तक स्कूल से अनुपस्थित रहे। यानी क्लास छोड़कर वे लगातार ऑफिस ड्यूटी निपटाते रहे।स्कूल में 3 बाबू फिर भी काम शून्य, प्राचार्य व्याख्याता को दे दिया प्रभार- सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस स्कूल में 3 नियमित बाबू पदस्थ हैं। लेकिन आरटीआई और प्रभार रजिस्टर के अनुसार उनके पास कोई वित्तीय या प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है। स्कूल में पदस्थ तीनों बाबू काम तो करना चाहते हैं, लेकिन स्कूल के प्रभारी प्राचार्य ने रसायन जैसे महत्वपूर्ण विषय के व्याख्याता को बाबू की पूरी जिम्मेदारी दे दी हैं। जिसका असर हर साल इस महत्वपूर्ण विषय के पढ़ाई पर पड़ रहा हैं। खरीदी और स्टॉक में गड़बड़ी- आरटीआई से मिले दस्तावेजों में विभिन्न मदों में अनियमित खरीदी के संकेत मिले हैं। समग्र शिक्षा मद में बार-बार रंगाई-पुताई, जाली खरीदी और परिश्रमिक भुगतान हुआ। जनभागीदारी मद से बच्चों के आईकार्ड, बोर और प्रिंटर मरम्मत के नाम पर खर्च दिखाया गया। विज्ञान निधि और विज्ञान क्लब में सामान खरीदी, रेडक्रास मद में दवाई और भूगोल मद में नक्शा खरीदी की गई।शासन द्वारा हर साल खेल सामग्री दी जाती है, लेकिन स्कूल की स्टॉक पंजी में उसका कोई उल्लेख नहीं है। प्रत्येक मद की खरीदी गई सामग्री को उसी सत्र में खर्च या नष्ट दर्शाकर मामला निपटा दिया गया।एसएमसी गठन में भी नियमों की अनदेखी- राज्य शासन ने पुरानी शाला प्रबंधन समिति को भंग कर नए सिरे से गठन के निर्देश दिए थे। नए नियम के अनुसार इस नए शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष केवल पालक हो सकते हैं। आरोप है कि जनभागीदारी खाते के प्रभारी व्याख्याता गिरवर यादव ने नई समिति बनाए बिना पुरानी फेवर वाली समिति से ही प्रस्ताव पारित करवा लिए। यह शासन के आदेशों की खुली अवहेलना है।                   इस पूरे मामले की लिखित शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी गरियाबंद को भेजी गई है। शिकायतकर्ता ने 2016 से व्याख्याता की उपस्थिति, प्रभार और खरीदी की निष्पक्ष जांच के लिए जांच समिति गठित करने की मांग की है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस अजब स्कूल के गजब किस्से पर क्या कार्रवाई करता है।

, ,,,,,,,,,,,,,,,,इस संबंध में रसायन के व्याख्याता गिरवर यादव ने बताया कि मेरे पास सिर्फ स्काउट-गाइड व रेड क्रॉस का प्रभार हैं। जिसके संबंध में मुझे स्कूल से बाहर रहना पड़ता हैं व फंड का लेन देन का कार्य प्राचार्य के पास होता हैं। अनियमितता व शिकायत के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं हैं।

,,,,,,,,,,,इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर ने कहा कि शिकायत के संबंध में मेरे पास कोई शिकायत नही आया हैं। अगर आया भी होगा तो इसकी मुझे जानकारी नही हैं। उन्होंने बताया कि अगर एक ही स्कूल में 3 बाबू हैं और पूरा काम व्याख्याता देख रहा हैं तो यह गलत हैं। अगर यह सही पाया जाता हैं तो कार्रवाई किया जाएगा। 



Source link

व्हाट्सएप से जुड़ें

अभी जुड़ें

इंस्टाग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें

Leave a Comment