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150 साल बाद फिर दिखा नीले-बैंगनी फूलों वाला दुर्लभ पौधा

By NS
On: July 12, 2026 11:38 PM
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नई दिल्ली। Rare plant: हिमालय की ऊंची चोटियों से एक बेहद दुर्लभ वनस्पति की दोबारा खोज ने वैज्ञानिकों और आयुर्वेद विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। करीब 150 साल बाद ‘सायनेंथस हुकेरी (Cyananthus hookeri)’ नाम का दुर्लभ पौधा अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले की चूना घाटी में मिला है। इस पौधे को पहले वर्ष 1867 में सिक्किम में दर्ज किया गया था।

वनस्पति विज्ञानियों ने इस पौधे को तवांग के मागो गांव के पास करीब 3,600 मीटर की ऊंचाई पर खोजा है। इसके नीले-बैंगनी रंग के घंटीनुमा फूल और पत्तियों पर मौजूद सफेद मखमली बाल इसे बर्फीली हवाओं, अत्यधिक ठंड और अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणों से बचाने में मदद करते हैं।

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आयुर्वेद और तिब्बती चिकित्सा में विशेष महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, इस पौधे के कुल की जड़ों और पत्तियों में सूजन कम करने, बैक्टीरिया से लड़ने और घाव भरने जैसे औषधीय गुण पाए जाते हैं। आयुर्वेद और तिब्बती चिकित्सा पद्धति सोवा-रिग्पा में इसका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है। इसकी जड़ों का उपयोग प्राकृतिक रंग और रतनजोत तेल जैसे पारंपरिक उत्पादों में भी किया जाता है।

लुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस दुर्लभ पौधे की दुनिया में 50 से भी कम प्रजातियां बची हैं। इसकी दोबारा खोज की जानकारी अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका Oryx में प्रकाशित हुई है। वहीं, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने भी इसे भारत की लुप्तप्राय वनस्पतियों में शामिल करते हुए इसके संरक्षण की सिफारिश की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज हिमालयी जैव विविधता, औषधीय अनुसंधान और दुर्लभ वनस्पतियों के संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।



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