
खबर हेमंत तिवारी,,,,,,,,
पाण्डुका= ग्राम कुरूद,सरकडा ,कोपरा आदि गांव के बीच खेत में धान कटाई के बाद लगाई गई भीषण आग गांव तक पहुंच गया जिसे ग्रामीण र बुझाते रहे फिर भी काबू नही पाया गया किसानों को अभी अपने फसल काटे सप्ताह भर भी नहीं बीते है और खेतों में पैरा को आग के हवाले कर रहे ।जिसमें ग्राम कुरूद के कई किसानों के समान तक जल गए इन दिनों पूरे देश में भीषण गर्मी पड़ रही है जिससे तापमान 45 डिग्री तक पहुंच गया है धूप आग की तरह चुभ रहा है इस बीच किसानों द्वारा अपनी फसल कटाई वा धान इकट्ठा होने के बाद आग लगा रहे है और जानवरों तक के लिए भी कुछ चारा भी छोड़ रहे।न ही पैरा को मवेशियों के लिए भी घर तक नहीं ले जाने दे रहे ,इससे पहले आग लगा रहे हैं।

इसमें भीषण आग की गर्मी से तपती धूप का पारा बढ़ा दिया है। खेतों में लगी आग आज दोपहर ग्राम कुरूद के प्राथमिक शाला पास पहुंच गया जहां आग स्कूल के पास लगे बरगद के हराभरा वृक्ष को भी अपने चपेट में ले लिया। वही सामने बयारा (खलिहान) में रखे ग्रामीण रोशन ध्रुव का दो लाख से अधिक का सुखी लकड़ी और 4 टन से ज्यादा का भूसा ईट पकाने के लिए रखा था जो आग के लपेटे में आ गया।इसी तरह एक दूसरा किसान जो ब्यारा में रखे तीन एकड़ से ज्यादा के पैरावट भी पूरी तरह जल गई ग्रामीणों की सूचना पर आग बुझाने फायर ब्रिगेड गाड़ी पहुंची लेकिन वह भी पूरी तरह काबू नहीं पा सकी साथ ही मौके पर पाण्डुका पुलिस भी पहुंची थी जो जांच कर रही है । जिस पर किसानों ने मुआवजा की मांग शासन से की है।

वही गरियाबंद जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की हैं कि पराली में आग न लगाए। पराली जलाने से खेत बंजर हो रहे है ।वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है। स्वास्थ पर बुरा असर पड़ेगा, पशुओं के लिय चारे की कमी होती हैं।ऐसे अनेक नुकसान बताए गए हैं जिस पर किसानों को हमेशा मनाही किया जाता है लेकिन किसानों द्वारा अपने ही भूमि को बंजर कर रहे फसल में आमदनी कम खर्चा ज्यादा बढ़ रहा है। पशु पालकों को भी अब चारे की चिंता सताने लगा है। अगर किसान समय रहते नहीं समझे तो खुद को ही आगे चलकर भयंकर परिणाम झेलने पड़ेंगे।


