

- स्वामी चिदानन्द सरस्वती से भेंट हेतुु परमार्थ त्रिवेणी पुष्प आये बागेश्वरपीठाधीश्वर आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री
- माँ गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, जीवनयात्रा और मोक्ष का मार्गं
- “नदियाँ नहीं तो दुनिया नहीं” : चिदानन्द सरस्वती
प्रयागराज। गंगा सप्तमी के पावन अवसर पर तीर्थराज प्रयागराज, त्रिवेणी संगम से परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने प्रेरणादायी संदेश दिया कि “नदियाँ नहीं तो दुनिया नहीं।” उन्होंने कहा कि नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति, सभ्यता और आध्यात्मिक चेतना की आधारशीला हैं। यदि नदियाँ सुरक्षित रहेंगी, तभी धरती पर जीवन, प्रकृति और भविष्य सुरक्षित रहेगा।
प्रयागराज यात्रा के दौरान पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दिव्य भेंटवार्ता की। परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में बागेश्वरपीठाधीश्वर आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री, पूज्य स्वामीजी से पावन भेंट हेतु पधारे। त्रिवेणी संगम पर यह दिव्य संगम आध्यात्मिक ऊर्जा, संस्कृति और राष्ट्रभाव का संगम है।
गंगा सप्तमी के शुभ अवसर पर पूज्य स्वामी जी ने कहा कि माँ गंगा भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। उनकी अविरलता और निर्मलता बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि माँ गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, जीवनयात्रा और मोक्ष का मार्ग हैं। माँ गंगा का संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि यह राष्ट्रधर्म और मानवधर्म है।
प्रयागराज में बागेश्वर पीठाधीश्वर पूज्य आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही हनुमंत कथा में स्वामी चिदानन्द सरस्वती का दिव्य सान्निध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। कथा में पूज्य स्वामी जी के आगमन से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, श्रद्धा और भक्ति से आलोकित हो उठा।
स्वामी ने अपने संबोधन में कहा कि हनुमानजी शक्ति, सेवा, समर्पण और भक्ति के सर्वोच्च प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि हनुमान जी ने अपना संपूर्ण जीवन प्रभु श्रीरामजी की सेवा और धर्म की स्थापना हेतु समर्पित किया। जहाँ कथा होती है, वहाँ केवल शब्द ही प्रवाहित नहीं होते बल्कि संस्कारों की गंगा प्रवाहित होती है। कथायें, अंतर्मन को जागृत करती है, जीवन को दिशा देती है और समाज को एकसूत्र में बाँधती है।
स्वामी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जैसे हम अपने घरों को स्वच्छ रखते हैं, वैसे ही अपनी नदियों, घाटों और जलस्रोतों को भी स्वच्छ रखें। उन्होंने कहा कि नदियों की स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही यह महान कार्य संभव है। यदि हम सब मिलकर संकल्प लें, तो आने वाली पीढ़ियों को निर्मल और जीवनदायिनी नदियाँ दे सकते हैं।
बागेश्वर पीठाधीश्वर आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने प्रयागराज वासियों को संदेश दिया कि श्रद्धा, सनातन संस्कार और भक्ति हमारे भीतर अद्भुत शक्ति जागृत करते हैं, भय को दूर करते हैं, साहस देते हैं और जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। हनुमान जी की कृपा से असंभव मार्ग भी सरल हो जाते हैं, नकारात्मकता मिटती है और आशा जागृत होती है। आज उन्होंने दिव्य दरबार का आयोजन किया। परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज में वेद विद्यापीठ बासर, तेलंगाना के वेद विद्यानंदगिरि स्वामी (वेदा स्वामी जी) वेद अध्ययन कर रही ऋषिकन्यायें और ऋषिकुमारों ने आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी का वेदमंत्रों से अभिनन्दन किया।
इस अवसर पर स्वामी जी व आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से प्रयागराज से पधारे अभिनव आचार्य जी महाराज, वृंदावन से आये अनेक संत व सुश्री श्वेता चैहान से गढ़मुक्तेश्वर में परमार्थ निकेतन द्वारा आयोजित होने वाली दिव्य गंगा आरती, पौधा रोपण आदि अनेक विषयों पर विस्तृत चर्चा की। स्वामी ने कहा कि गढ़मुक्तेश्वर पश्चिम उत्तरप्रदेश का हरिद्वार है, उसके लिये सभी पूज्य संतों को एक साथ आना होगा।


