बैज बोले – टीएस दिल्ली जाएं, जवाब आया – छत्तीसगढ़ में रहूंगा!

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रायपुर। Chhattisgarh Congress का अध्यक्ष कौन बनेगा? क्या दीपक बैज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने रहेंगे या टी एस सिंहदेव बनेंगे नए अध्यक्ष? या कोई और नेता इस कुर्सी को हासिल करेगा?

कांग्रेस की यह कुर्सी पहेली की तरह है। जब तक पार्टी कोई फैसला करे या यह साफ हो जाए कि पार्टी कोई फैसला नहीं करने जा रही है तब तक उठापटक तो चलती ही रहेगी।

ताजा हलचल जानिए।

शुक्रवार सुबह अपनी नियमित मीडिया बाइट में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज श्री सिंहदेव को लेकर कहते हैं कि वो वरिष्ठ नेता हैं। उन्हें दिल्ली में रहना चाहिए !

दीपक बैज ने कहा कि टीएस  सिंहदेव बड़े नेता हैं और पहले भी कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे राज्यों के प्रभारी की जिम्मेदारी भी निभाई है। ऐसे में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर काम करना चाहिए।

दीपक बैज ने जो कहा वो अनायास नहीं था।

दरअसल टी एस सिंहदेव ने प्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि वे प्रदेश अध्यक्ष बन कर संगठन का काम करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर उन्हें जिम्मेदारी मिलेगी तो वे जरूर निभाएंगे। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस की सत्ता में वापसी तभी संभव है, जब कांग्रेस खुद को बेहतर विकल्प के रूप में पेश करे। फिलहाल संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में काम चल रहा है।

तब इधर श्री सिंहदेव ने अपनी इच्छा जताई थी और उधर दिल्ली से खबरें आने लगीं थीं कि पार्टी आलाकमान भी उनके नाम पर सहमत है।

टी एस सिंहदेव उन राजनेताओं में गिने जाते हैं जो अपने मन की बात साफ़–साफ़ कह देने में हिचकते नहीं हैं। लेकिन जब उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष बनने की इच्छा जताई तो माना गया कि उनके मन की बात और पार्टी के आला नेताओं के एक हिस्से के मन की बात मेल खाती है।

चर्चा तेज हुई कि टीएस सिंहदेव  छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अगले अध्यक्ष हो सकते हैं।

इस चर्चा को भी जब एक अरसा गुज़र गया और कांग्रेस में कोई फेरबदल नहीं हुआ तब पता चला कि छत्तीसगढ़ में पार्टी के सारे वरिष्ठ नेताओं की राय एक नहीं है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और श्री सिंहदेव की दूरियां तो जग जाहिर हैं लेकिन बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में पार्टी का एक तबका इस बात पर सहमत था कि दीपक बैज ही बने रहें।

सतह पर शांति थी लेकिन भीतर तो हलचल थी ही।

अब दीपक बैज के ताजा बयान ने इस हलचल को सतह पर ला कर रख दिया है।

इधर दीपक बैज का यह बयान वायरल हुआ और उधर टीम टी एस ने भी कमर कसी। कुछ घंटों के भीतर ही टी एस सिंहदेव का एक वीडियो बयान प्रेस तक पहुंचा गया।

अपने इस बयान में श्री सिंहदेव ने कहा, ‘छत्तीसगढ़ का हूं। छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए ही काम करना चाहता हूं। मुझे सब कुछ छत्तीसगढ़ कांग्रेस से मिला है।‘

टीएस सिंहदेव ने आगे कहा कि उन्हें नहीं पता कि बैज ने किस सोच के साथ यह बात कही। उन्होंने कहा कि वे आज भी खुद को युवा ऊर्जा से भरपूर महसूस करते हैं और पूरी तरह सक्रिय हैं। सिंहदेव ने कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र के साथ पूरे छत्तीसगढ़ में लगातार लोगों से मिल रहे हैं और प्रदेश के लिए ही काम करना चाहते हैं।

इतना ही नहीं, टीएस बाबा ने चुनाव हार-जीत का जिक्र करते हुए ये भी कहा कि ‘मैं चुनाव हारा, लेकिन दीपक बैज भी चुनाव हार चुके हैं।‘

याद होगा कि 2023 विधानसभा चुनाव में समूचे सरगुजा संभाग में कांग्रेस पार्टी साफ हो गई थी। सरगुजा में चली इस सत्ता विरोधी आंधी की चपेट में श्री सिंहदेव भी आ गए थे।

दरअसल, छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल 10 जून को खत्म हो रहा है। और नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर पार्टी में जबरदस्त लॉबिंग शुरू हो चुकी है।

2018 में जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनी तब करीब पांच साल भूपेश बघेल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे।उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने तत्कालीन डॉ रमन सिंह की सरकार के खिलाफ जम कर काम किया था। तब टी एस सिंहदेव उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़े थे और इस जोड़ी को जय और वीरु की जोड़ी कहा जाने लगा।

माना जाता है कि भाजपा की सरकार के खिलाफ इसी लड़ाई का नतीजा छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी। लेकिन, जब मुख्यमंत्री के चयन की बात आयी तो जय और वीरु आमने सामने थे। ये अलग मसला है।

Chhattisgarh Congress

अब देखना है कि छत्तीसगढ़ में पार्टी का एक प्रभावशाली चेहरा माने जाने वाले जय यानि भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत जैसे दिग्गजों का साथ किसे मिलता है?

यहां जब बात इन दो नामों की हो रही है तो यह जानना बेहद जरूरी है कि दीपक बैज की ताकत ये है कि वे युवा आदिवासी चेहरा हैं। वहीं, टीएस सिंह देव कांग्रेस के वरिष्ठ और सौम्य चेहरा माने जाते हैं।

यह भी सवाल है कि कहीं इन दोनों के बजाए पार्टी में किसी और  के नाम की पर्ची ना खुल जाए। यह भी देखना होगा कि इस मसले पर छत्तीसगढ़ से रायशुमारी होती है या फैसला दिल्ली से ही आता है, जैसा कि कांग्रेस में आम तौर पर आया ही करता है।

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