
लेंस न्यूज। पश्चिम बंगाल में मतदान की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग (EC) ने सख्त नियम बना दिया है। अगर किसी भी मतदान बूथ पर लगी वेबकैम (webcam) मतदान के दिन किसी भी छोटी अवधि के लिए निष्क्रिय रह जाती है तो चुनाव आयोग बिना किसी रिपोर्ट के उस बूथ पर रिपोल (repoll) का आदेश दे सकता है। इसके लिए प्रीसाइडिंग ऑफिसर या माइक्रो-ऑब्जर्वर की रिपोर्ट की अब जरूरत नहीं होगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार यह कदम 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में वेबकैम के साथ हुई बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ को देखते हुए उठाया गया है। कई बूथों पर कैमरे ऐसे कोण में लगाए गए थे कि अंदर की गतिविधि रिकॉर्ड न हो सके। कुछ कैमरों पर काला टेप चिपका दिया गया या उन्हें काले रंग से पेंट कर दिया गया। लगभग 40 प्रतिशत कैमरे ठीक से काम नहीं कर रहे थे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जिला चुनाव अधिकारियों (DEOs), सामान्य पर्यवेक्षकों और पुलिस पर्यवेक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में यह फैसला घोषित किया।
नया नियम क्या कहता है?
अधिकारियों ने बताया कि अगर राज्य के लगभग 80,000 मतदान बूथों में से किसी भी बूथ पर वेबकैम 30 मिनट या उससे अधिक समय तक बंद रहती है तो रिपोल का आदेश दिया जा सकता है। पहले रिपोल तभी होता था जब प्रीसाइडिंग ऑफिसर या माइक्रो-ऑब्जर्वर बूथ कैप्चरिंग, वोटिंग मशीन में गड़बड़ी या प्रॉक्सी वोटिंग जैसी अनियमितताओं की रिपोर्ट करते थे। अब वेबकैम की निष्क्रियता ही पर्याप्त वजह होगी।
2021 और 2024 के चुनावों में वेबकैम लगाने वाली पुरानी एजेंसी की कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दी गई है क्योंकि उसने छेड़छाड़ की रिपोर्ट नहीं की थी। अब नई एजेंसियों को सभी बूथों पर वेबकैम लगाने का काम सौंपा गया है।


