श्योपुर। Unique Marriage: कहते हैं कि प्यार उम्र का मोहताज नहीं होता। यह कब, कहां और किससे हो जाए, कोई नहीं जानता। मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले से एक ऐसी ही अनोखी प्रेम कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहां 60 वर्ष की उम्र में दो अकेले लोगों ने एक-दूसरे का सहारा बनने का फैसला किया और महज 15 से 20 दिनों की पहचान के बाद शादी के बंधन में बंध गए। मंदिर में शुरू हुई यह प्रेम कहानी अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार श्योपुर जिले के छोटा खेड़ा गांव निवासी घनश्याम मीणा (60 वर्ष) कुछ समय पहले राजस्थान सीमा से लगे प्रसिद्ध रामगढ़ माता मंदिर में दर्शन और परिक्रमा करने पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात राजस्थान के बारां जिले के मांगरोल क्षेत्र की रहने वाली गौरां बाई मीणा (60 वर्ष) से हुई। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के साथ बैठकर चाय पीने के दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई।

शुरुआती बातचीत धीरे-धीरे आत्मीयता में बदल गई। दोनों ने एक-दूसरे को अपने जीवन के संघर्षों, सुख-दुख और अकेलेपन के बारे में बताया। बातचीत का यह सिलसिला लगातार चलता रहा और दोनों के बीच एक खास रिश्ता बन गया।
दरअसल, गौरां बाई के पति का पहले ही निधन हो चुका था। उनके परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं। वहीं घनश्याम मीणा भी अपनी पत्नी के निधन के बाद अकेले जीवन बिता रहे थे। उनके तीन बेटे हैं और सभी की शादी हो चुकी है। उम्र के इस पड़ाव पर दोनों को एक ऐसे साथी की जरूरत महसूस हुई, जो उनके सुख-दुख में साथ खड़ा रह सके।
करीब 15 से 20 दिनों तक लगातार संपर्क में रहने और एक-दूसरे को समझने के बाद दोनों ने जीवनभर साथ रहने का निर्णय ले लिया। सबसे पहले दोनों ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए कोर्ट मैरिज की। इसके बाद परिवार और समाज की मौजूदगी में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न हुआ और दोनों ने सात फेरे लेकर एक-दूसरे का जीवनसाथी बनने का संकल्प लिया।
इस प्रेम कहानी में एक दिलचस्प मोड़ तब आया, जब गौरां बाई घर नहीं लौटीं तो उनके बेटे ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी। बाद में जब परिवार को पूरे मामले की जानकारी मिली और पता चला कि गौरां बाई ने अपनी इच्छा से विवाह किया है, तब स्थिति स्पष्ट हुई और मामला शांत हो गया।
इस शादी की सबसे खास बात यह रही कि घनश्याम मीणा के बेटों ने अपने पिता के फैसले का खुलकर समर्थन किया। परिवार के सहयोग से यह विवाह संपन्न हुआ, जिसने समाज में एक सकारात्मक संदेश भी दिया है कि जीवन के किसी भी पड़ाव पर इंसान को भावनात्मक सहारे और साथ की जरूरत होती है।
आज यह अनोखी शादी पूरे श्योपुर और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इस जोड़े की सराहना कर रहे हैं और इसे इस बात का उदाहरण मान रहे हैं कि सच्चे रिश्ते उम्र नहीं, बल्कि विश्वास, समझ और अपनापन देखकर बनते हैं।
यह कहानी एक बार फिर साबित करती है कि प्यार की कोई उम्र नहीं होती। जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आई हों, यदि सही साथी मिल जाए तो हर उम्र में नई शुरुआत की जा सकती है।
