नई दिल्ली। Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने अदालतों में लंबित मामलों को लेकर कहा है कि इसके लिए केवल न्यायपालिका को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मामलों में देरी के कई कारण होते हैं, लेकिन सबसे अधिक आलोचना न्यायपालिका को ही झेलनी पड़ती है। यह टिप्पणी उन्होंने एक याचिका की सुनवाई के दौरान की, जहां संसद में लंबित मामलों को लेकर चल रही चर्चा का भी जिक्र किया।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट एक चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में गुजरात हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें अतिरिक्त साक्ष्य पेश करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने हाई कोर्ट द्वारा लगाए गए जुर्माने का मुद्दा भी उठाने की कोशिश की, लेकिन जस्टिस दीपांकर दत्ता ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने कहा कि न्यायपालिका अक्सर आलोचना का सबसे बड़ा निशाना बनती है। उन्होंने कहा, “हम ही सबसे ज्यादा आलोचना झेलते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने अखबार में पढ़ा कि संसद में यह चर्चा हो रही है कि न्यायपालिका लोगों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही है। हालांकि, मामलों के लंबित रहने के पीछे कई अन्य कारण भी हैं, इसलिए केवल न्यायपालिका को दोष देना उचित नहीं है।
इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने भी कहा कि लंबित मामलों और न्याय मिलने में देरी के मुद्दे पर न्यायपालिका “सबसे आसान निशाना” बन गई है। इस पर जस्टिस दत्ता ने श्री रामकृष्ण परमहंस की पत्नी शारदा देवी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा, “दूसरों की गलतियां मत देखिए, पहले अपनी गलतियां देखिए।”
सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिका पर राहत देने से मना कर दिया।
इसी बीच संसद में लंबित मामलों को लेकर भी आंकड़े सामने आए हैं। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में लिखित उत्तर में बताया कि सुप्रीम कोर्ट में 10 साल से अधिक समय से 10,000 से ज्यादा मामले लंबित हैं। वहीं, देश के विभिन्न हाई कोर्टों में 30 साल से अधिक पुराने करीब 80,000 मामले अब भी लंबित हैं। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद न्यायिक व्यवस्था में लंबित मामलों और न्याय में देरी को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।







