NEET पर्चा लीकः एनटीए की भूमिका की भी जांच हो

NFA@0298
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देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) का पर्चा लीक होने के बाद एनटीए ने 3 मई को हुई परीक्षा को भले ही रद्द कर फिर से परीक्षा करवाने का फैसला कर लिया है, लेकिन इस घटना ने उसकी भूमिका को फिर से कठघरे में खड़ा कर दिया है।

नीट की परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया था और इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश के मेडिकल कॉलेज के दाखिले के लिए कितनी कठिन प्रतिद्वंद्विता है। ऐसे में यदि पर्चा लीक हो जाए और महीनों से तैयारी कर रहे इन युवाओं को फिर से परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जाए, तो पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठते हैं।

पता चला है कि परीक्षा से दो-तीन दिन पहले राजस्थान के सीकर में गेस पेपर के नाम पर नीट के पर्चे से मिलते-जुलते पर्चे 20 हजार से दो लाख रुपये में खुलेआम बिक रहे थे!

जाहिर है, ये सब जांच का विषय है। लेकिन यह समझना रॉकेट साइंस नहीं है कि नीट की जिस परीक्षा को देश की सबसे कठिनतम परीक्षाओं में में शुमार किया जाता है, उसकी व्यवस्था तक पहुंच उच्च स्तर के संरक्षण के बिना संभव नहीं हो सकती।

यह सब तब हुआ है, जब एनटीए दावा करता है कि पूरी परीक्षा की एआई से निगरानी की जाती है, प्रश्न पत्र की जीपीएस ट्रेकिंग की जाती है औऱ सुरक्षा के लिए 5जी जेमर का भी इस्तेमाल किया जाता है! आखिर इतनी कठोर सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने वाले कौन लोग हैं?

दो साल पहले 2024 में भी नीट की परीक्षा के पर्चे बिहार से लीक हुए थे और इसका पता नतीजे आने के बाद ही चला था जब 67 परीक्षार्थियों को 720 में से 720 अंक मिल गए थे। दरअसल शक तब हुआ था जब कुछ परीक्षार्थियों को 718 और 719 अंक मिले थे और तकनीकी रूप से और मार्किंग के तरीके के हिसाब से संभव नहीं था। शुरू में तो एनटीए ने लीपापोती करने की कोशिश की थी आखिरकार मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था। जांच से पता चला था कि किस तरह से परीक्षा से पहले ही बिहार और झारखंड सहित देश के कई इलाकों में संगठित गिरोह के जरिये नीट के पर्चे से मिलता जुलता पर्चा अनेक परीक्षार्थियों को बेचा गया था। ताजा घटना बताती है कि 2024 के बाद कोई सबक नहीं लिया गया।

पर्चे लीक होने की पीड़ा उन लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से पूछी जा सकती है, जो बड़ी मेहनत से इसकी तैयारी करते हैं। त्रासद यह है कि देश के युवाओं का मनोबल तोड़ने वाली ऐसी घटनाओं से पूरी व्यवस्था को फर्क नहीं पड़ता। बेशक, इस मामले में जांच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन इसके साथ ही जरूरी है कि उच्च स्तर पर जवाबदेहियां सुनिश्चित की जाए। यह भी जरूरी है कि एनटीए की भूमिका की भी पूरी पारदर्शिता के साथ जांच हो।

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