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JPSC नौकरी के नाम पर 70 लाख तक का खेल! CID पूछताछ में

By NS
On: August 12, 2026 11:43 PM
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रांची। JPSC Scam: झारखंड में JPSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रही जांच के बीच CID की पूछताछ में कथित तौर पर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। मामले में गिरफ्तार TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के बयान के आधार पर जांच एजेंसी को अभ्यर्थियों से रकम वसूलने से लेकर इंटरव्यू में कथित तौर पर मदद पहुंचाने तक के नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली है। हालांकि, सामने आए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।

बताया जा रहा है कि मामला 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा है। पूछताछ में अभय तिवारी ने कथित तौर पर CID को बताया कि परीक्षा के अलग-अलग चरणों में अभ्यर्थियों से अलग-अलग रकम मांगी जाती थी। शुरुआती स्तर पर रकम कुछ लाख रुपये से शुरू होती थी, जबकि अंतिम चयन तक पहुंचने पर यह राशि कथित रूप से कई गुना बढ़ जाती थी।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अलग-अलग रकम

जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से प्रारंभिक परीक्षा में कथित मदद के नाम पर करीब 5 लाख रुपये तक लिए जाने की बात कही गई है। वहीं SC और ST वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए यह रकम करीब 2 से 3 लाख रुपये बताई गई है।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि यदि किसी अभ्यर्थी को अंतिम चयन तक कथित तौर पर पहुंचाना होता था तो पूरी प्रक्रिया में खर्च होने वाली रकम 60 से 70 लाख रुपये तक पहुंचने की बात कही गई। इस कथित रेट कार्ड ने जांच एजेंसियों के सामने मामले की गंभीरता और नेटवर्क के विस्तार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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एजेंटों और बिचौलियों के जरिए संपर्क

CID को दिए गए कथित बयान के अनुसार, अभ्यर्थियों को सीधे नेटवर्क तक पहुंचाने के बजाय एजेंटों और बिचौलियों की भूमिका रहती थी। अभय तिवारी ने कथित तौर पर आदित्य पांडे के जरिए एक अभ्यर्थी उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की है।

इसके बाद कथित रूप से अन्य लोगों के माध्यम से JPSC से जुड़े व्यक्तियों तक संपर्क साधा गया। जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि इंटरव्यू में अंक बढ़वाने के लिए प्रति अभ्यर्थी करीब 15 लाख रुपये तक की रकम तय की जाती थी।

तीन चयनित अधिकारियों के नाम भी सामने आने का दावा

पूछताछ के दौरान अभय तिवारी ने कथित तौर पर पुलिस अधीक्षक रोबिन कुमार, पुलिस उपाधीक्षक शैलेश सिंह और डिप्टी जेलर राजेश कुमार रजक के नामों का भी उल्लेख किया है। बयान के मुताबिक, इन अभ्यर्थियों के लिए कोडरमा निवासी लालू यादव ने कथित तौर पर एजेंट की भूमिका निभाई थी।

आरोप है कि अभ्यर्थियों को आगे संपर्कों तक पहुंचाने और इंटरव्यू बोर्ड में कथित सेटिंग कराने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका अंतिम रूप से जांच के निष्कर्षों और साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।

ऐसे काम करता था कथित नेटवर्क

CID की पूछताछ से सामने आई जानकारी के आधार पर कथित नेटवर्क की तस्वीर कुछ इस तरह बताई जा रही है—

अभ्यर्थी → एजेंट/बिचौलिया → संपर्क सूत्र → संबंधित नेटवर्क → रकम तय → इंटरव्यू बोर्ड → कथित तौर पर अधिक अंक → अंतिम चयन

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित नेटवर्क कितना बड़ा था, इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे और पैसों के लेन-देन का पूरा तंत्र किस तरह संचालित होता था। मामले में सामने आ रहे बयानों और अन्य साक्ष्यों को आपस में मिलाकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।



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