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CG NEWS: गरियाबंद में आदिवासी एकता का शक्ति प्रदर्शन

By NS
On: August 9, 2026 9:40 PM
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गरियाबंद। CG NEWS: विश्व आदिवासी दिवस पर रविवार को गरियाबंद में आदिवासी समाज ने जल-जंगल-जमीन, संवैधानिक अधिकार और राजनीतिक भागीदारी के मुद्दे पर एकजुटता दिखाई। कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली विधायक मुकेश सहरावत, छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल, दिल्ली विधायक बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक राम ध्रुव, जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में मंच से पेसा कानून, ग्रामसभा की भूमिका, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आरक्षण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और जल-जंगल-जमीन पर स्थानीय समुदाय के अधिकारों के मुद्दे उठाए गए। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए आदिवासी विरासत और सामाजिक एकता का संदेश दिया गया। इसके पहले गरियाबंद आगमन अतिथियों का बाइक रैली, आतिशबाजी और जोरदार नारों के साथ अतिथियों का स्वागत किया गया। रैली में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के युवा, महिलाएं और ग्रामीण शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे लोगों ने आदिवासी एकता और संस्कृति का संदेश दिया।

संजय सिंह बोले- बिरसा मुंडा को मिले भारत रत्न

राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि देश में करीब साढ़े 10 करोड़ आदिवासी हैं और आजादी के बाद से समाज जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहा है। उन्होंने कहा कि देश में अब तक 53 लोगों को भारत रत्न मिल चुका है, लेकिन आदिवासी समाज के किसी योद्धा को यह सम्मान नहीं मिला। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा को भारत रत्न देने की मांग की।

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उन्होंने न्यायपालिका में आदिवासी प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट बनने के बाद आदिवासी समाज से न्यायाधीशों का प्रतिनिधित्व बेहद कम रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करने का सबसे बड़ा हथियार है। संजय सिंह ने सरकारी स्कूलों की स्थिति, पेपर लीक, रोजगार और देश के प्राकृतिक संसाधनों के निजीकरण को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

पेसा और ग्रामसभा की सहमति पर जोर

संजय सिंह ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में जमीन से जुड़े फैसलों में ग्रामसभा की भूमिका और सहमति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव में किसे वोट देना है, यह जनता का फैसला है, लेकिन आदिवासी समाज को अपने वोट की ताकत समझनी होगी।

अमित बघेल बोले- जल-जंगल-जमीन बची तो समाज बचेगा

छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने कहा कि संविधान लागू हुए 76 साल हो गए, लेकिन आदिवासी समाज आज भी अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा, “जल, जंगल और जमीन बचेगी, तभी आदिवासी समाज बचेगा।” उन्होंने भाजपा और पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए समाज से अपने अधिकारों के लिए संगठित होने का आह्वान किया। बघेल ने कहा कि आदिवासी समाज को अपने वोट की कीमत समझनी होगी। “वोट की कीमत साड़ी या शराब नहीं हो सकती।” उन्होंने चुनाव के समय नेताओं से स्कूल, अस्पताल, शिक्षा, रोजगार और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा पर सवाल पूछने की अपील की।

2028 में देंगे जवाब, राज भी हम करेंगे और नीति भी

अमित बघेल ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक संदेश देते हुए कहा कि 2028 में जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक के रूप में देखने की राजनीति अब नहीं चलेगी। समाज को अपनी राजनीतिक ताकत पहचानकर सत्ता और नीति निर्धारण में निर्णायक भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा, राज भी हम करेंगे और नीति भी हम बनाएंगे।
बघेल ने हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल किए और आदिवासी हितों के साथ पर्यावरण की रक्षा की बात कही।

जनक राम ध्रुव बोले- अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता जरूरी

विधायक जनक राम ध्रुव ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और अधिकार जल, जंगल और जमीन से जुड़े हैं। संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए समाज को एकजुट रहना होगा। जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम ने कहा कि शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान के साथ आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा भी समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए।



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