नई दिल्ली। Breaking News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही केंद्रीय कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा विभागों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। वहीं, प्रधानमंत्री की सलाह पर ही कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके वर्तमान विभागों के अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपने का निर्देश दिया गया है।

इस फैसले के बाद प्रह्लाद जोशी फिलहाल अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का कामकाज भी संभालेंगे।
NEET-UG विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है, जब NEET-UG परीक्षा को लेकर कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद देशभर में छात्र आंदोलन और राजनीतिक बयानबाजी तेज रही है। परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर छात्र संगठन लगातार सवाल उठा रहे थे।
इस पूरे विवाद की शुरुआत मई 2026 में NEET-UG परीक्षा के बाद हुई। परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोप सामने आने के बाद छात्रों ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। धीरे-धीरे मामला बड़े छात्र आंदोलन में बदल गया और विपक्ष ने भी केंद्र सरकार तथा शिक्षा मंत्रालय को घेरना शुरू कर दिया।
सोनम वांगचुक के आंदोलन से बढ़ी चर्चा
28 जून 2026 को सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़े और उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, पेपर लीक के मामलों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई।
लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। बाद में सरकार के साथ बातचीत और मांगों पर सकारात्मक विचार किए जाने का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।
संसद मार्च के दौरान भी हुआ था प्रदर्शन
20 जुलाई को छात्र आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इस घटनाक्रम के बाद छात्र आंदोलन एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया।
विपक्ष ने भी NEET-UG विवाद को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाया और परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की।
25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा

लगातार चल रहे विवाद के बीच 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आई। प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने का फैसला किया गया।
प्रह्लाद जोशी पहले से केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। नई व्यवस्था के तहत उनके मौजूदा विभाग उनके पास बने रहेंगे और इसके अतिरिक्त वह शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
प्रह्लाद जोशी के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां

शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा प्रणाली को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच भरोसा मजबूत करने की होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, पेपर लीक और कथित अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई के साथ परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने जैसे मुद्दे उनके सामने प्रमुख चुनौती के रूप में रहेंगे।
NEET-UG विवाद के बाद देशभर में परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच शिक्षा मंत्रालय में हुआ यह बदलाव राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।






