Avimukteshwaranand कराएंगे आजम खान और अखिलेश यादव में दोस्ती

NFA@0298
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नई दिल्ली। स्वामी Avimukteshwaranand की गविष्ठि यात्रा अब समाजवादी पार्टी के अंदरूनी सियासी समीकरणों को सुधारने का अहम जरिया बनती दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस महीने अखिलेश यादव नसीमुद्दीन सिद्दीकी के साथ आजम खान से मुलाकात करने जा रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को दूर करने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मध्यस्थ की बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

आजम खान और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच की निकटता जगजाहिर रही है। 2016 में आजम खान उत्तर प्रदेश के मंत्री थे। 17 जुलाई 2016 को उन्होंने वाराणसी में शंकराचार्य मठ पहुंचकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की थी। इस भेंट में दोनों के बीच विस्तृत चर्चा हुई थी। यह पुरानी निकटता अब फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गई है।

बता दें कि गविष्ठि यात्रा जब कन्नौज पहुंची थी, तब सैफई में डिंपल यादव और शिवपाल सिंह यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की। दोनों ने उनका भव्य स्वागत किया और गौ-रक्षा के मुद्दे पर समर्थन जताया। स्वयं अखिलेश यादव भी गविष्ठि यात्रा का खुलकर समर्थन कर चुके हैं।

वहीं कासगंज क्षेत्र में यात्रा पहुंचते ही आजम खान परिवार की रिश्तेदारों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से विशेष मुलाकात की। इसी मुलाकात के बाद स्वामी जी ने अखिलेश यादव को आजम खान से जल्द भेंट करने की सलाह दी है। कासगंज की पटियाली विधानसभा में यात्रा के स्वागत की अगुवाई आजम खान के भांजे की पत्नी और सपा विधायक नादिरा सुल्तान ने की थी। उनके साथ सपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता जाहिदा सुल्तान (नादिरा की बहन) भी सक्रिय रहीं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जाहिदा सुल्तान को कासगंज में अपना विधानसभा प्रतिनिधि भी नियुक्त कर दिया है।

गौरतलब है कि गविष्ठि यात्रा के दौरान हर जिले में रात्रि विश्राम से लेकर स्वागत मंच और जनसभाओं की व्यवस्था में स्थानीय सपा नेताओं की प्रमुख भूमिका देखी जा रही है। वहीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी भाजपा खासकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखे और व्यक्तिगत हमले भी कर रहे हैं।

सपा के लिए यह कवायद 2027 के चुनावों में यादव-मुस्लिम-पिछड़े गठजोड़ को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिरमठ के शंकराचार्य पद को लेकर विवादित रहे हैं, लेकिन सपा उन्हें हिन्दू भावनाओं को छूने और भाजपा पर हमला करने वाले चेहरे के रूप में उपयोग कर रही है।

अखिलेश-आजम मुलाकात में अविमुक्तेश्वरानंद की मध्यस्थता तय करेगी कि क्या दोनों के बीच पुरानी दोस्ती फिर कायम हो पाएगी।



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