गुजराती व राजस्थानी भेड़ बकरी चरवाहे जंगल की ओर बढ़ रहे हैं।क्या,,वन विभाग का फिर मिलेगा संरक्षण ,,,,

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खबर हेमंत तिवारी,,,,✍️✍️

राजिम (पाण्डुका )/ गरियाबंद जिले के हरे भरे पेड़ पौधों को एक बार फिर नाश करने लाखों की संख्या में गुजराती राजस्थानी चरवाहे इन दिनों फिर मैदानी क्षेत्र से जंगल क्षेत्र की और आगे बढ़ रहे हैं जो राजिम, कोपरा,अभनपुर,कुरूद ,मगरलोड जैसे अन्य जगहों के खेतों के आसपास आसानी से देखे जा सकते हैं। बता दे की लाखों की संख्या में भेड़ बकरी लेकर यह एक बार फिर गरियाबंद जिले के हरे-भरे जंगल को नष्ट करने पहुंच रहे हैं। हाल ही में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया और पेड़ पौधे वा जंगल को सुरक्षित करने के लिए बड़े-बड़े कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया और पौधारोपण कर उसे सुरक्षित करने बड़े बड़े भाषण भी दिए गए थे।

कि कैसे पेड़ को बचाना है। ऐसे में जब लाखों की संख्या में भेड़ बकरी पहुंचेंगे तो छोटे-छोटे पौधे कैसे बचेंगे । हर साल वन विभाग की संरक्षण में यह अवैध चराई सालों से चलते आ रहा है जिस पर आज तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है जबकि पिछले वर्ष की बात की जाए तो उदंती सितानदी टाइगर रिजर्व के अंतर्गत कुछ राजस्थानी भेड़ बकरियों के ऊपर एवं उनके मालिकों के ऊपर भारी भरकम जुर्माना लगाया गया था । ऐसा कार्यवाही सामान्य वन मंडल क्यों नहीं ,,, गरियाबंद वन मंडल के विभिन्न परिक्षेत्र के कोई भी बिट में बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है जिसके वजह से यह भेड़ बकरी लेकर गरियाबंद जिला में प्रवेश करते हैं।वा पूरी बारिश पाण्डुका परिक्षेत्र के जतमई, घटारानी जंगल में बिताते हैं।इनके भेड़ बकरी हरे भरे पेड़ पौधे पर चरते हैं।

वा इनके खुरो से छोटे छोटे पौधे नष्ट हो जाते है। जिससे स्थानीय मवेशियों के लिए चारे की समस्या पैदा होती है साथ ही जंगली जानवर को भी अपने परंपरागत निवास के लिए जंगल में संघर्ष करना पड़ता है और जो डरकर बिदक जाते हैं। और गांव को ओर रुख करते है।इन लाखों भेड़ बकरियों ,ऊंट घोड़ा के साथ कई प्रकार की संक्रमण बीमारिया भी साथ में लाते हैं। जिससे किसानों की पालतू पशु बीमार हो जाते है।ऐसे में क्या वन विभाग इस बार इन पर लगाम लगा पाएंगे या फिर छोटे कर्मचारियों से लेकर बड़े अधिकारियों तक इस अवैध चराई में संरक्षण देंगे।



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