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असली जैसी चमक, नकली थी खनक! 25 साल से बना रहे थे

By NS
On: September 14, 2026 4:34 AM
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सहारनपुर। Fake Coin Gang: नकली नोटों की खबरें तो आपने खूब सुनी होंगी, लेकिन सहारनपुर में पुलिस ने नकली सिक्के बनाने वाले जिस गिरोह का पर्दाफाश किया है, उसने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। यहां सिर्फ नकली सिक्के तैयार नहीं किए जाते थे, बल्कि उन्हें असली जैसा दिखाने के लिए मशीन, डाई, पॉलिशिंग और फिनिशिंग का पूरा इंडस्ट्रियल सेटअप तैयार किया गया था।

पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह के पास रोजाना करीब 12 हजार 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार करने की क्षमता थी। कार्रवाई के दौरान छह मशीनें, अलग-अलग तरह की डाई, पॉलिशिंग मशीन और कई दूसरे उपकरण बरामद किए गए हैं। मौके से बड़ी संख्या में अधबने सिक्के भी मिले हैं।

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मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में कुल आठ लोगों के गिरोह की जानकारी सामने आई है, जबकि तीन आरोपी अभी फरार हैं। अब पुलिस की जांच का सबसे बड़ा फोकस इस बात पर है कि इतने बड़े पैमाने पर तैयार किए जा रहे नकली सिक्के आखिर किन रास्तों से बाजार तक पहुंचते थे और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।

25 साल पुराने नेटवर्क की खुल रही कुंडली

इस पूरे मामले में मोहाली, पंजाब निवासी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह का नाम मास्टरमाइंड के तौर पर सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, वह वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के धंधे में शामिल बताया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, दिल्ली पुलिस उसे पहले गिरफ्तार कर चुकी है और एक समय उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित था। अब सहारनपुर पुलिस उसके पुराने मामलों, संपर्कों और नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इतने लंबे समय में उसके साथ कौन-कौन लोग जुड़े और क्या पुराने नेटवर्क के लोग ही अलग-अलग जगहों पर नए ठिकानों के जरिए इस कारोबार को आगे बढ़ाते रहे।

सात रजिस्टर खोलेंगे नकली सिक्कों का राज?

पुलिस के हाथ लगे सात रजिस्टर इस मामले में बेहद अहम माने जा रहे हैं। इन रजिस्टरों में दर्ज हिसाब-किताब से गिरोह के लेनदेन, सप्लाई और संपर्कों की जानकारी सामने आ सकती है।

पुलिस अब रजिस्टर में दर्ज नामों और नंबरों की जांच कर रही है। अगर इनमें सिक्कों की सप्लाई, रकम या खरीदारों से संबंधित जानकारी मिलती है तो जांच उन लोगों तक भी पहुंच सकती है, जो नकली सिक्कों को बाजार में खपाने का काम करते थे।

यानी पुलिस उस जगह तक पहुंच चुकी है जहां सिक्के तैयार किए जा रहे थे, लेकिन अब असली चुनौती उन रास्तों को तलाशना है, जिनके जरिए नकली सिक्के बाजार तक पहुंचते थे।

आठ मोबाइल फोन भी जांच का बड़ा आधार

सात रजिस्टरों के साथ पुलिस ने आठ मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। इन मोबाइलों की जांच से आरोपियों के संपर्कों और उनकी गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में थे, किन राज्यों में उनका नेटवर्क था और सहारनपुर आने से पहले वे कहां सक्रिय थे। मोबाइल से मिलने वाले नंबरों और संपर्कों को आरोपियों के पुराने नेटवर्क से मिलाकर भी जांच की जा रही है।

रोज बन सकते थे 12 हजार नकली सिक्के

पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने नकली सिक्के बनाने के लिए सामान्य स्तर का नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल लेवल का सेटअप तैयार किया था।

कार्रवाई के दौरान छह मशीनें, लोहे की डाई, बिना मोहर की डाई, मोहर लगी डाई, पॉलिशिंग मशीन और दूसरे उपकरण बरामद हुए। इस सेटअप की क्षमता करीब 12 हजार 20 रुपये के सिक्के प्रतिदिन तैयार करने की बताई जा रही है।

मौके से डाई पॉलिश करने की मशीन, घिसाई के पत्थर, ब्रश और दूसरे औजार भी मिले हैं। इसके अलावा रेती, हथौड़े, आरी, रिंच, शिकंजा, प्लास और पेचकश जैसे उपकरण भी बरामद किए गए हैं।

इन सामानों से संकेत मिलता है कि सिक्कों की ढलाई के बाद उनकी घिसाई, पॉलिशिंग और फिनिशिंग का काम भी इसी जगह किया जाता था।

हालांकि पुलिस अभी यह मानकर नहीं चल रही है कि वर्ष 2001 से लेकर अब तक हर दिन इसी क्षमता से सिक्के तैयार किए गए। इसलिए बाजार में खपाए गए नकली सिक्कों की वास्तविक संख्या और उनकी कुल कीमत का आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

70 करोड़ से ज्यादा के नकली सिक्के खपाने का अनुमान

पूछताछ में नकली सिक्कों को बड़े पैमाने पर बाजार में चलाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस की शुरुआती जांच में 70 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के नकली सिक्के बाजार में खपाए जाने का अनुमान लगाया गया है।

हालांकि एसएसपी अभिनंदन के मुताबिक, आरोपियों ने अभी तक कोई सटीक रकम नहीं बताई है। ऐसे में 70 करोड़ रुपये का आंकड़ा फिलहाल प्रारंभिक अनुमान है, अंतिम आंकड़ा नहीं।

अब पुलिस सात रजिस्टर, आठ मोबाइल फोन, पुराने रिकॉर्ड और आर्थिक लेनदेन की जांच के जरिए वास्तविक रकम का पता लगाने में जुटी है। जांच आगे बढ़ने पर यह भी सामने आ सकता है कि यह नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ था।

छोटे लेनदेन वाली जगहों पर खपाए जाते थे सिक्के

पुलिस के मुताबिक, गिरोह नकली सिक्कों को उन जगहों पर खपाने की कोशिश करता था जहां रोज बड़ी संख्या में छोटे नकद लेनदेन होते हैं। शराब के ठेके, टोल टैक्स और छोटे कारोबारी ऐसे स्थान बताए गए हैं।

इन जगहों पर बड़ी संख्या में सिक्कों का लेनदेन होता है, इसलिए हर सिक्के की बारीकी से जांच करना आसान नहीं होता। पुलिस का कहना है कि गिरोह इसी स्थिति का फायदा उठाता था।

एसएसपी अभिनंदन के मुताबिक, नकली सिक्के देखने में काफी हद तक असली सिक्कों जैसे दिखाई देते हैं। आम व्यक्ति के लिए दोनों में अंतर करना आसान नहीं होता।

सहारनपुर में नया बेस बनाने की तैयारी

पुलिस के मुताबिक, आरोपी सहारनपुर में अपना बेस तैयार करने की तैयारी में थे, लेकिन इससे पहले ही संयुक्त टीम ने उन्हें पकड़ लिया। अब जांच इस दिशा में भी आगे बढ़ रही है कि सहारनपुर में उन्हें किसकी मदद मिल रही थी और क्या यहां पहले से उनका कोई नेटवर्क मौजूद था।

फिलहाल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस फरार तीन आरोपियों की तलाश कर रही है। साथ ही बरामद रजिस्टर और मोबाइल फोन की जांच के जरिए इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

नकली सिक्कों की चमक और खनक भले ही असली जैसी थी, लेकिन अब पुलिस की जांच इस पूरे 25 साल पुराने नेटवर्क की परत-दर-परत पोल खोलने में जुटी है।



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