पर्यावरणीय शिकायत पर त्वरित एवं निष्पक्ष कार्रवाई के लिए संबंधित प्राधिकरण को निर्देश
क्रशर निर्माण काफी आगे बढ़ने के बाद भी पर्यावरण विभाग निर्माण नही होने का कोर्ट में किया दावा, मिलीभगत की आ रही बु
पाटन। पाटन तहसील के ग्राम पतोरा में प्रस्तावित गिट्टी (एग्रीगेट) क्रशिंग प्लांट के खिलाफ सीमावर्ती ग्राम मुड़पर निवासी लोचन प्रसाद यादव द्वारा दायर याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।
WPC No. 4009/2026 की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच ने पर्यावरणीय शिकायत के निराकरण के लिए याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकरण, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित पर्यावरणीय प्राधिकरण को आवेदन पर कानून के अनुरूप, सभी प्रासंगिक पहलुओं की जांच करते हुए त्वरित एवं निष्पक्ष निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।
क्रशर प्लांट की वैधानिकता और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर उठाए सवाल
लोचन प्रसाद यादव ने ग्राम पतोरा स्थित खसरा नंबर 192/4 में प्रस्तावित गिट्टी क्रशिंग प्लांट को लेकर उसकी वैधानिकता, आवश्यक अनुमतियों, पर्यावरणीय स्वीकृति तथा अन्य वैधानिक अनुपालनों की जांच की मांग की थी।
याचिका में आशंका जताई गई थी कि क्रशर प्लांट स्थापित होने से क्षेत्र में धूल, वायु एवं ध्वनि प्रदूषण बढ़ सकता है, जिसका आसपास रहने वाले ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ-साथ कृषि गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
पहले कई विभागों में की शिकायत, कार्रवाई नहीं होने पर पहुंचे हाईकोर्ट
याचिकाकर्ता के अनुसार, उन्होंने क्रशर प्लांट की स्थापना को लेकर पहले ही कलेक्टर, खनिज विभाग, अनुविभागीय अधिकारी, पर्यावरण विभाग सहित संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायतों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
सुनवाई के दौरान पर्यावरण विभाग की ओर से न्यायालय को बताया गया कि उक्त क्रशर प्लांट की स्थापना के संबंध में विभाग से किसी प्रकार की अनुमति प्राप्त नहीं की गई है। विभाग की ओर से यह भी कहा गया कि शिकायत के बाद स्थल निरीक्षण किया गया, जहां क्रशर प्लांट निर्माणाधीन नहीं पाया गया।
लोचन यादव का आरोप—“न्यायालय के समक्ष वास्तविक स्थिति छिपाई गई”
वहीं, याचिकाकर्ता लोचन प्रसाद यादव ने पर्यावरण विभाग की इस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि न्यायालय के समक्ष वास्तविक स्थिति प्रस्तुत नहीं की गई। उनका कहना है कि संबंधित भूमि पर क्रशर प्लांट के निर्माण के लिए बेस तैयार किया जा चुका है और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
लोचन यादव ने कहा कि यदि स्थल का वास्तविक निरीक्षण किया जाता है तो निर्माणाधीन क्रशर प्लांट की स्थिति स्पष्ट रूप से सामने आ जाएगी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिर पर्यावरण विभाग में आवेदन देंगे लोचन यादव
लोचन यादव ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप वे अब पुनः पर्यावरण विभाग के समक्ष विस्तृत आवेदन प्रस्तुत करेंगे। आवेदन के साथ निर्माणाधीन क्रशर प्लांट से संबंधित गूगल मैप लोकेशन एवं फोटो सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे और प्लांट के निर्माण एवं संचालन पर नियमानुसार रोक लगाने की मांग की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि स्थल निरीक्षण के दौरान शिकायतकर्ता की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि विभागीय अधिकारियों को मौके पर निर्माणाधीन क्रशर प्लांट की वास्तविक स्थिति दिखाई जा सके। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि निर्माण इतना आगे बढ़ गया है लेकिन पर्यावरण विभाग कोर्ट में कोई निर्माणाधीन क्रशर नही होने की बात कर रहा है
“निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो न्यायालय की शरण लेंगे”
लोचन यादव ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें उम्मीद है कि पर्यावरण विभाग मामले में निष्पक्ष और कानूनसम्मत कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत पर हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे आगे माननीय उच्च न्यायालय में अवमानना अथवा अन्य वैधानिक कानूनी उपाय अपनाने के लिए बाध्य होंगे।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद पतोरा में प्रस्तावित क्रशर प्लांट को लेकर पर्यावरणीय जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर क्षेत्रवासियों की नजर बनी हुई है।








