Option Trading in Hindi: शेयर बाजार में ट्रेडिंग के कई तरीके हैं, लेकिन ऑप्शन ट्रेडिंग सबसे तेज और जोखिम भरे तरीकों में से एक है। इसमें अपेक्षाकृत कम पूंजी के जरिए बाजार में बड़े मूवमेंट से फायदा उठाने की कोशिश की जाती है। हालांकि, इसमें मुनाफे की संभावना जितनी बड़ी होती है, नुकसान का जोखिम भी उतना ही ज्यादा होता है। इसलिए ऑप्शन ट्रेडिंग शुरू करने से पहले इसके बेसिक कॉन्सेप्ट को समझना बेहद जरूरी है।
ऑप्शन ट्रेडिंग एक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट है। इसमें ट्रेडर किसी शेयर या इंडेक्स को सीधे खरीदने के बजाय उसके ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेड करता है। ऑप्शन खरीदार को किसी तय कीमत यानी Strike Price पर किसी एसेट को खरीदने या बेचने का अधिकार देता है, लेकिन उस अधिकार का इस्तेमाल करना उसके लिए अनिवार्य नहीं होता। इस अधिकार के बदले खरीदार जो रकम देता है, उसे Premium कहा जाता है।

ऑप्शन ट्रेडिंग में कौन-कौन शामिल होते हैं?
ऑप्शन Buyer: प्रीमियम देकर ऑप्शन खरीदता है और उसे भविष्य में तय शर्तों पर ट्रेड करने का अधिकार मिलता है।
ऑप्शन Seller/Writer: ऑप्शन बेचकर प्रीमियम प्राप्त करता है। अगर खरीदार अपने अधिकार का इस्तेमाल करता है तो विक्रेता पर कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें पूरी करने की जिम्मेदारी होती है।
Call और Put Option क्या होते हैं?
Call Option (CE): जब ट्रेडर को लगता है कि शेयर या इंडेक्स की कीमत बढ़ सकती है, तो वह Call Option खरीद सकता है। Call Buyer को तय Strike Price पर खरीदने का अधिकार देता है।
Put Option (PE): जब ट्रेडर को बाजार में गिरावट की आशंका होती है, तो वह Put Option खरीद सकता है। Put Buyer को तय Strike Price पर बेचने का अधिकार देता है।
ऑप्शन ट्रेडिंग के 3 जरूरी शब्द
Premium: ऑप्शन खरीदने के लिए चुकाई जाने वाली कीमत।
Strike Price: वह पूर्व निर्धारित कीमत जिस पर ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के अनुसार खरीद या बिक्री का अधिकार जुड़ा होता है।
Expiry Date: वह तारीख जब ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की वैधता समाप्त होती है।
ITM, ATM और OTM क्या होता है?
ऑप्शन की स्थिति को मौजूदा बाजार कीमत और Strike Price के संबंध के आधार पर मुख्य रूप से तीन हिस्सों में समझा जाता है।
1. In The Money (ITM):
Call Option के मामले में जब Strike Price मौजूदा बाजार कीमत से कम होती है, तो वह ITM होता है। Put Option में इसका उल्टा होता है यानी Strike Price बाजार कीमत से अधिक होने पर Put ITM होता है।
2. At The Money (ATM):
जब Strike Price और मौजूदा बाजार कीमत लगभग बराबर होती है, तो इसे ATM कहा जाता है। ऐसे ऑप्शन में बाजार की छोटी-बड़ी चाल के साथ प्रीमियम में तेजी से बदलाव हो सकता है।
3. Out of The Money (OTM):
Call Option में जब Strike Price बाजार कीमत से ऊपर होती है, तो वह OTM होता है। Put Option में Strike Price बाजार कीमत से नीचे होने पर वह OTM कहलाता है। OTM ऑप्शन का प्रीमियम अपेक्षाकृत कम हो सकता है, लेकिन इसके पूरी तरह बेकार यानी समाप्त हो जाने का जोखिम भी रहता है।
कौन-कौन सी ऑप्शन ट्रेडिंग रणनीतियां हैं?
ट्रेडर्स बाजार की दिशा और संभावित उतार-चढ़ाव के हिसाब से अलग-अलग रणनीतियों का इस्तेमाल करते हैं।
Long Call: बाजार में तेजी की उम्मीद होने पर Call खरीदना।
Long Put: बाजार में गिरावट की आशंका होने पर Put खरीदना।
Short Call और Short Put: इनमें ट्रेडर ऑप्शन बेचता है और प्रीमियम प्राप्त करता है, लेकिन जोखिम काफी अधिक हो सकता है।
Straddle: एक ही Strike Price का Call और Put दोनों खरीदना या बेचना। आमतौर पर बड़ी खबर या तेज उतार-चढ़ाव की उम्मीद में इसका इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इसकी रणनीति और जोखिम को समझना बेहद जरूरी है।
कम समय में बड़ा मुनाफा, लेकिन जोखिम भी बड़ा
ऑप्शन ट्रेडिंग में कभी-कभी किसी ऑप्शन के प्रीमियम में बहुत तेज उछाल देखने को मिलता है। इसी वजह से यह नए ट्रेडर्स को आकर्षित करता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि लगातार मुनाफा कमाना आसान नहीं है। बाजार की दिशा गलत होने, समय निकलने और प्रीमियम में गिरावट के कारण ट्रेडर को बड़ा नुकसान हो सकता है।
SEBI की ओर से जारी अध्ययनों में भी व्यक्तिगत इक्विटी F&O ट्रेडर्स के बड़े हिस्से के नुकसान में रहने की बात सामने आई है। इसलिए ऑप्शन ट्रेडिंग को कम पैसों में जल्दी अमीर बनने की मशीन समझना खतरनाक हो सकता है।
ऑप्शन ट्रेडिंग में उतरने से पहले बाजार की समझ, जोखिम प्रबंधन, ट्रेडिंग अनुशासन और पूंजी प्रबंधन को समझना जरूरी है। खासकर नए निवेशकों को बिना जानकारी और बिना जोखिम समझे किसी भी ऑप्शन में पैसा लगाने से बचना चाहिए।






