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हरेली पक्षी महोत्सव: चीचा वेटलैंड में गूंजी पक्षियों की चहचहाहट, 44 प्रजातियों के 500 पक्षी दर्ज…विद्यार्थियों ने जाना कम्युनिटी नेस्टिंग का महत्व

By NS
On: August 14, 2026 3:42 PM
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पाटन।राज्य में स्थानीय पक्षियों की उपस्थिति और गणना के लिए हरेली पक्षी महोत्सव का आयोजन किया गया।14 से 16 अगस्त तक चलने वाले पक्षी महोत्सव के अंतर्गत ब्लॉक के चीचा वेटलैंड में बर्ड वॉक का आयोजन किया गया।शुक्रवार को बर्ड वॉक और पक्षी गणना में विशेषज्ञों और छात्र-छात्राओं को प्रकृति का एक अद्भुत रूप देखने को मिला। गणना के दौरान वेटलैंड में 44 अलग-अलग प्रजातियों के लगभग 500 पक्षी दर्ज किए गए। इस दौरान सबसे बड़ा आकर्षण अपने घोसलों पर बैठे ‘स्नेक बर्ड’ (ओरिएंटल डार्टर) रहे, जिन्हें देखकर विद्यार्थी रोमांचित हो उठे।बर्ड वॉक में महात्मा गांधी वानिकी विश्वविद्यालय के शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

पक्षी विशेषज्ञ राजू वर्मा अभिषेक मैत्री और डॉ यामिनी बघेल के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने पूरे दलदली क्षेत्र (वेटलैंड) का भ्रमण किया। विशेषज्ञों ने बच्चों को दूरबीन और आधुनिक उपकरणों के जरिए पक्षियों की पहचान करना और उनकी गणना करने की वैज्ञानिक तकनीकों को सिखाया।कम्युनिटी नेस्टिंग का जाना महत्वभ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने न केवल पक्षियों को देखा, बल्कि उनके घोंसलों का भी बारीकी से निरीक्षण किया। पक्षी विशेषज्ञ राजू वर्मा ने इस दौरान छात्रों को ‘कम्युनिटी नेस्टिंग’ (सामूहिक घोंसला निर्माण) के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया।

उन्होंने बताया कि कैसे अलग-अलग प्रजातियों के पक्षी अपनी और अपने अंडों की सुरक्षा के लिए एक ही पेड़ या आस-पास के इलाके में मिलकर घोंसले बनाते हैं। यह उनके सामाजिक व्यवहार और पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) को संतुलित रखने के लिए बेहद जरूरी है।आकर्षण का केंद्र रहे ‘स्नेक बर्ड’इस बर्ड वॉक का सबसे रोमांचक पल तब आया जब विद्यार्थियों ने ओरिएंटल डार्टर, जिसे आम बोलचाल में ‘स्नेक बर्ड’ कहा जाता है, को उनके घोंसलों पर बैठे देखा। पानी में तैरते समय इसकी लंबी और लचीली गर्दन सांप की तरह दिखाई देती है, इसलिए इसे स्नेक बर्ड कहा जाता है। छात्र इन पक्षियों की गतिविधियों को लाइव देखकर बेहद उत्साहित नजर आए।

चीचा वेटलैंड में इतनी बड़ी संख्या में पक्षियों की मौजूदगी और उनकी प्रजातियों की विविधता यह दर्शाती है कि यह क्षेत्र जैव विविधता (Biodiversity) के लिए एक आदर्श और सुरक्षित स्थान बनता जा रहा है।



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