Urea Subsidy RTI: देश में किसानों को सस्ती दरों पर यूरिया उपलब्ध कराने की सरकारी योजना पर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का असर साफ दिखाई देने लगा है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में आयातित (इंपोर्टेड) यूरिया पर सरकार की सब्सिडी में एक साल के भीतर 128.4 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय तनाव, विशेषकर अमेरिका-ईरान संघर्ष, इसकी प्रमुख वजह हैं।
उर्वरक विभाग द्वारा RTI के जवाब में दी गई जानकारी के मुताबिक, 2025-26 में आयातित यूरिया पर सरकार ने 47,956.24 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की, जबकि 2024-25 में यह राशि लगभग 21,000 करोड़ रुपये थी। यानी महज एक साल में सब्सिडी का खर्च दोगुने से भी अधिक हो गया।

भारत में किसानों को 45 किलोग्राम यूरिया की बोरी सरकार द्वारा तय की गई रियायती कीमत पर उपलब्ध कराई जाती है। बाजार मूल्य और किसानों से वसूली जाने वाली कीमत के बीच का अंतर सरकार उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी के रूप में देती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत बढ़ने का सीधा असर किसानों पर नहीं, बल्कि सरकारी खजाने पर पड़ता है।
RTI के आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि जहां आयातित यूरिया पर सब्सिडी तेजी से बढ़ी है, वहीं स्वदेशी यूरिया पर दी जाने वाली सब्सिडी में 8.8 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह राशि 2024-25 में 1,03,319.50 करोड़ रुपये थी, जो 2025-26 में घटकर 94,219.50 करोड़ रुपये रह गई।
हालांकि, कुल मिलाकर देश में यूरिया सब्सिडी का खर्च बढ़ा है। घरेलू और आयातित यूरिया को मिलाकर कुल सब्सिडी 2024-25 के 1,24,319.50 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1,42,175.74 करोड़ रुपये हो गई, जो लगभग 14.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों का कारोबार अमेरिकी डॉलर में होने के कारण रुपये की कमजोरी का सीधा असर आयात लागत पर पड़ता है। इसके अलावा वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों ने भी उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी की है, जिससे सरकार का सब्सिडी बिल लगातार बढ़ रहा है।
वहीं चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। 23 जुलाई 2026 तक सरकार आयातित यूरिया पर 27,722.45 करोड़ रुपये और स्वदेशी यूरिया पर 32,746.51 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी कर चुकी है। हालांकि उर्वरक विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान अभी तैयार नहीं किए गए हैं।
फिलहाल किसानों के लिए यूरिया की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और वे पहले की तरह रियायती दर पर खाद खरीद रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डॉलर मजबूत बना रहा और वैश्विक हालात सामान्य नहीं हुए, तो आने वाले समय में सरकार पर सब्सिडी का आर्थिक बोझ और बढ़ सकता है।









