नगर पालिका परिषद बैठक में तीखी बहस: नामांतरण,

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वीरेंद्र वर्मा / आरंग। नगर पालिका परिषद की बैठक में विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दों को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विशेष रूप से नामांतरण के मामलों, बजट प्रबंधन और विकास कार्यों में देरी को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।

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बैठक के दौरान नेता प्रतिपक्ष शरद जीतू गुप्ता ने आरोप लगाया कि परिषद द्वारा रोके गए नामांतरण प्रकरणों को बाद में स्वीकृत कर दिया गया, जो परिषद के निर्णय के विपरीत है। अधिकारियों ने जवाब में इसे त्रुटिवश हुई प्रक्रिया बताया, जिस पर विपक्ष ने नाराजगी जताते हुए इसे परिषद की अवमानना बताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अध्यक्ष डॉ संदीप जैन ने संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।

फर्जी नामांतरण के आरोपों पर भी विपक्ष आक्रामक रहा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके अलावा, पार्षदों से विकास कार्यों के लिए मांग पत्र नहीं लेने और कार्यों में समुचित समन्वय के अभाव का मुद्दा भी उठाया गया।

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राजस्व और बजट पर सवाल
राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए और टैक्स वसूली में अनियमितताओं को लेकर नाराजगी जताई। बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए 72 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया गया। वहीं, पूर्व अवधि में लगभग 1.77 करोड़ रुपये का प्रावधान, 2.64 करोड़ रुपये का भुगतान, 1.40 करोड़ रुपये की शासकीय प्राप्ति सहित 3.17 करोड़ रुपये की आय का उल्लेख किया गया। डीजल मद में करीब 33 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी भी सामने आई। जिस पर विपक्ष ने आपत्ति जताई।

सफाई व्यवस्था और संसाधनों की स्थिति
नगर की सफाई व्यवस्था पर चर्चा के दौरान कचरा वाहनों की खराब स्थिति और सीमित संसाधनों को लेकर चिंता व्यक्त की गई। वर्तमान में 6 टीपर, 5 ट्रैक्टर और 1 जेसीबी उपलब्ध होने के बावजूद कार्य प्रभावित होने की बात कही गई।

विकास कार्यों में देरी पर नाराजगी
पार्षदों ने आरोप लगाया कि उनके वार्डों में अपेक्षित विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। बस स्टैंड निर्माण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। बताया गया कि 42 लाख रुपये का भुगतान ठेकेदार को किए जाने के बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। विपक्ष ने इस पर शीघ्र कार्य प्रारंभ कराने की मांग की।

अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे
बैठक में शराब दुकानों पर करारोपण, सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 3-4 महीनों से लंबित भुगतान और बिजली अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए रजिस्ट्री दस्तावेज मांगे जाने जैसे

मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
नेता प्रतिपक्ष ने संबंधित मामलों के तीन माह के दस्तावेज प्रस्तुत करने की मांग की और नाराजगी व्यक्त करते हुए इस्तीफे की पेशकश भी की। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष का कार्य विरोध करना है, जिस पर विपक्ष ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे नगर की छवि प्रभावित हो रही है।



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