ग्लासगो। CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पाकिस्तान की 22 वर्षीय मुक्केबाज फातिमा जहरा ने इतिहास रचते हुए 60 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही वह राष्ट्रमंडल खेलों की बॉक्सिंग स्पर्धा में पदक जीतने वाली पाकिस्तान की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं। उनकी इस उपलब्धि की सबसे खास बात यह है कि बॉक्सिंग की दुनिया में कदम रखने की प्रेरणा उन्हें भारत की दिग्गज मुक्केबाज मैरी कॉम और उनकी जिंदगी पर बनी बॉलीवुड फिल्म से मिली थी।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा शहर की रहने वाली फातिमा जहरा ने अपनी जीत के बाद खुलासा किया कि बचपन में उन्होंने मैरी कॉम के जीवन पर बनी वर्ष 2014 की बॉलीवुड फिल्म देखी थी। उस समय वह महज 10 साल की थीं और उसी फिल्म ने उनके भीतर बॉक्सिंग को लेकर जुनून पैदा किया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने बॉक्सिंग शुरू की, तब वह अक्सर मैरी कॉम की फिल्म देखकर ही ट्रेनिंग करती थीं।

फातिमा ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं भारत की मैरी कॉम से बहुत प्रेरित हूं। मैं उनकी जिंदगी पर बनी फिल्म बार-बार देखती थी और उसी से सीखकर अभ्यास करती थी। मैं उनका बेहद सम्मान करती हूं और उम्मीद करती हूं कि एक दिन उनसे मुलाकात जरूर होगी।”
फातिमा का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने बताया कि उनका परिवार शुरू में बॉक्सिंग के खिलाफ था और उन्हें ट्रेनिंग के लिए जाने की अनुमति भी नहीं देता था। सीमित संसाधनों और पारिवारिक विरोध के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अपने शुरुआती कोच के मार्गदर्शन में लगातार मेहनत की और आज पाकिस्तान की महिला बॉक्सिंग के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया।
फातिमा की संघर्ष भरी कहानी भारत की महान मुक्केबाज मैरी कॉम की यात्रा से काफी मिलती-जुलती है। मणिपुर के एक साधारण किसान परिवार से आने वाली मैरी कॉम ने आर्थिक तंगी, सामाजिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बावजूद छह बार विश्व चैंपियन बनने के साथ ओलंपिक पदक भी जीता। उनके संघर्ष और सफलता की कहानी पर बनी फिल्म ‘मैरी कॉम’ में अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने मुख्य भूमिका निभाई थी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और इसे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
फातिमा का मानना है कि उनका यह ऐतिहासिक पदक पाकिस्तान की कई लड़कियों के लिए नई प्रेरणा बनेगा। उन्होंने कहा कि यदि उनके जैसी साधारण पृष्ठभूमि की लड़की अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीत सकती है, तो देश की अन्य बेटियां भी अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं। उनका यह प्रदर्शन न सिर्फ पाकिस्तान बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में महिला बॉक्सिंग के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।






