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Trump Tariff: ट्रंप का भारत पर एक और टैरिफ वार! लगाया

By NS
On: July 24, 2026 4:52 AM
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नई दिल्ली/वॉशिंगटन। Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति के बीच भारत को एक और झटका लगा है। अमेरिका ने कथित तौर पर फोर्स्ड लेबर यानी जबरन मजदूरी से जुड़े उत्पादों को लेकर सख्ती बढ़ाते हुए भारत से आयात होने वाले सामान पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत कुल 17 देशों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ वाले समूह में रखा गया है। नई दरें शुक्रवार से लागू होने की बात कही गई है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने सेक्शन 301 के तहत की गई जांच के बाद यह फैसला लिया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई उन देशों को लेकर की गई है, जहां फोर्स्ड लेबर से बने उत्पादों को रोकने के लिए उठाए गए कदम पर्याप्त या प्रभावी नहीं पाए गए।

भारत पर 10% अतिरिक्त टैरिफ

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत को 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ वाले निचले स्लैब में रखा गया है। इससे पहले आशंका जताई जा रही थी कि भारत पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।

हालांकि, श्रम मानकों को लेकर भारत और अमेरिका के बीच हुई बातचीत के बाद भारत को 10 प्रतिशत वाले स्लैब में रखने की बात सामने आई है।

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ट्रंप के आदेश के बाद 60 देशों की हुई समीक्षा

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिका ने करीब 60 व्यापारिक साझेदार देशों की नीतियों की समीक्षा की। इसमें यह देखा गया कि संबंधित देश अपनी सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी से तैयार उत्पादों को रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं।

समीक्षा के बाद अलग-अलग देशों के लिए अतिरिक्त टैरिफ की दरें निर्धारित की गईं। भारत को जहां 10 प्रतिशत वाले समूह में रखा गया, वहीं कुछ देशों पर अतिरिक्त शुल्क 12.5 प्रतिशत तक होने की बात कही गई है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश पर भी 10% टैरिफ

इस फैसले का असर केवल भारत पर नहीं पड़ेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत, अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, कनाडा, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास, इंडोनेशिया, जॉर्डन, मलेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और ब्रिटेन को 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ वाले समूह में रखा गया है।

इस तरह अमेरिका के नए फैसले की जद में दक्षिण एशिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं आ गई हैं।

क्या बोला अमेरिका?

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के मुताबिक वैश्विक सप्लाई चेन से फोर्स्ड लेबर को खत्म करने के लिए केवल अपील पर्याप्त साबित नहीं हुई है। अमेरिका लंबे समय से जबरन मजदूरी से तैयार सामान के आयात पर प्रतिबंध लागू करता रहा है और अब वह अपने व्यापारिक साझेदारों से भी प्रभावी कदम उठाने की अपेक्षा कर रहा है।

भारत ने भी बढ़ाई निगरानी

रिपोर्ट्स के मुताबिक अतिरिक्त टैरिफ की आशंका के बीच भारत ने फोर्स्ड लेबर से जुड़े उत्पादों की पहचान और निगरानी को लेकर दिशानिर्देश तैयार करने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुपालन को मजबूत करना बताया गया है।

इन उत्पादों पर नहीं पड़ेगा असर

स्टील और एल्युमिनियम जैसे जिन उत्पादों पर पहले से अलग सेक्टोरल टैरिफ लागू हैं, उन्हें इस नई व्यवस्था से बाहर रखे जाने की बात कही गई है। इसके अलावा कुछ ऊर्जा उत्पादों और उर्वरकों को भी अतिरिक्त शुल्क से छूट दी गई है। USMCA के तहत होने वाले पात्र व्यापार पर भी अलग नियम लागू रहेंगे।

अमेरिका के इस कदम से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर एक बार फिर नजरें टिक गई हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ का भारतीय निर्यात पर कितना असर पड़ता है और भारत इस फैसले पर आगे क्या रुख अपनाता है।



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