नई दिल्ली। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने उन अमेरिकी सहयोगियों की निंदा की है जिन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकरों को सुरक्षित निकालने में मदद के लिए युद्धपोत भेजने की उनकी मांगों को ठुकरा दिया।
ट्रंप ने सोमवार को कहा कि दशकों तक सुरक्षा सहायता प्राप्त करने के बाद वे अमेरिका के प्रति पर्याप्त रूप से वफादार नहीं हैं।
सीएनएन के अनुसार ट्रंप ने व्हाइट हाउस के एक कार्यक्रम के दौरान अपने भाषण में बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि कई देशों ने मुझे बताया है कि वे रास्ते में हैं। कुछ लोग इसके प्रति बहुत उत्साहित हैं, और कुछ नहीं। इनमें से कुछ ऐसे देश हैं जिनकी हमने कई वर्षों से मदद की है। हमने उन्हें बाहरी खतरों से बचाया है, फिर भी वे इतने उत्साहित नहीं थे। और उत्साह का स्तर मेरे लिए मायने रखता है।
ट्रम्प ने बाद में कहा कि उनका प्रशासन भविष्य में ऐसे देशों की एक सूची जारी करेगा ।उन्होंने कहा, ‘हमारे पास कुछ ऐसे लोग हैं जो वाकई बहुत उत्साहित हैं। वे आ रहे हैं। वे वहां पहुंचना शुरू भी कर चुके हैं। आप जानते हैं, वहां पहुंचने में थोड़ा समय लगता है।’
महत्वपूर्ण है कि ट्रंप ने विवादित जलमार्ग से तेल टैंकरों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने में मदद के लिए अन्य देशों को मनाने की कोशिश की है, लेकिन अब तक अमेरिकी सहयोगी या तो अनिर्णायक रहे हैं या उन्होंने उनकी मांगों को सिरे से खारिज कर दिया है।
ट्रंप ने कहा, ‘कुछ देशों में हमारे 45,000 सैनिक तैनात हैं, बेहतरीन सैनिक, जो उन्हें खतरे से बचा रहे हैं, और हमने बहुत अच्छा काम किया है, जब हम जानना चाहते हैं, ‘क्या आपके पास कोई बारूदी सुरंग हटाने वाली मशीनें हैं तो जवाब होता है, महोदय, हम इसमें शामिल नहीं होना चाहेंगे।’
ईरान द्वारा टैंकरों पर लगातार गोले दागे जाने के बावजूद, ट्रंप ने संभावित नौसैनिक अभियान को बहुत मामूली बात बताया। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उन्हें पता था कि अमेरिकी सहयोगी अमेरिका का समर्थन नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा, ‘मैं देशों की सुरक्षा करने के सभी प्रयासों का कड़ा आलोचक रहा हूं क्योंकि मुझे पता है कि हम उनकी रक्षा करेंगे। और अगर हमें कभी मदद की जरूरत पड़ी, तो वे हमारे लिए मौजूद नहीं होंगे। मैं यह बात लंबे समय से जानता हूं।’


