
केंद्र की ‘मिसिंग चिल्ड्रन’ रिपोर्ट जारी, हर रोज तीन बच्चों का औसत
रायपुर, 9 मार्च। छत्तीसगढ़ में बच्चों की गुमशुदगी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। जहाँ 1 जनवरी 25 से 31 जनवरी 2026 के बीच 982 बच्चे लापता हुए। पुलिस ने 582 बच्चों को बरामद कर लिया है, लेकिन 400 बच्चे अभी भी लापता हैं। इस मामले में छत्तीसगढ़ देश में छठे स्थान पर है और लापता बच्चों में 14-17 साल की लड़कियों की संख्या अधिक है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ‘मिसिंग चिल्ड्रन’ रिपोर्ट के अनुसार 1 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच देशभर में कुल 33,577 बच्चे लापता दर्ज किए गए।
आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि छत्तीसगढ़ से लापता होने वाले बच्चों में 14 से 17 साल की उम्र के किशोरों की संख्या अधिक है। खास बात यह है कि इस आयु वर्ग में लड़कियों की संख्या लड़कों से ज्यादा पाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव तस्करी, बाल श्रम, घर से भागने जैसी कई वजहें इन मामलों के पीछे हो सकती हैं।
इन मामलों में पश्चिम बंगाल पहले स्थान पर है। यहां इस अवधि में 19,145 बच्चे लापता हुए। इनमें से 15,465 बच्चों को खोज लिया गया, लेकिन 3,680 बच्चे अब भी गायब हैं।
इसके बाद मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर है, जहां 4,256 बच्चे लापता हुए। इनमें से 1,059 बच्चों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
रिपोर्ट के अनुसार देश के कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इस अवधि के दौरान बच्चों के लापता होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई। इनमें नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, गुजरात, लक्षद्वीप और दादर एवं नगर हवेली शामिल हैं।


