पाटन। रंगों और भाईचारे का पर्व होली अब धीरे-धीरे अपनी पारंपरिक पहचान खोता नजर आ रहा है। गांवों और शहरों में पहले जहां फाग गीत, ढोल-नगाड़ों की मधुर धुन और सामूहिक उत्सव का माहौल रहता था, वहीं अब कई जगहों पर नशे और हुड़दंग की प्रवृत्ति बढ़ती दिखाई दे रही है।
होली भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है जो प्रेम, आपसी भाईचारा और सामाजिक एकता का संदेश देता है। पहले होली के दिनों में गांव-मोहल्लों में फाग गीत गाए जाते थे, ढोल और नगाड़ों की धुन पर लोग पारंपरिक अंदाज में होली मनाते थे। बुजुर्गों और युवाओं की टोली घर-घर जाकर फाग गाकर माहौल को उत्सवमय बना देती थी।
लेकिन समय के साथ यह परंपरा धीरे-धीरे कम होती जा रही है। अब कई स्थानों पर पारंपरिक फाग गीत और नगाड़ों की आवाज सुनाई नहीं देती। इसकी जगह तेज डीजे, शराब और अन्य नशे का चलन बढ़ता जा रहा है, जिससे त्योहार की मूल भावना प्रभावित हो रही है।
कई लोग बताते हैं कि नशे में धुत कुछ लोगों की हरकतों के कारण परिवार और महिलाएं बाहर निकलने से कतराते हैं। स्थिति यह हो जाती है कि प्रेम और भाईचारे के इस पर्व के दिन भी कई लोग अपने घरों में ही रहने को मजबूर हो जाते हैं।
समाज के जागरूक लोगों का कहना है कि होली जैसे पवित्र और सांस्कृतिक पर्व की गरिमा बनाए रखने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। पारंपरिक फाग गीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक उत्सव को बढ़ावा देकर ही होली के असली रंग और आनंद को वापस लाया जा सकता है।
होली पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से मनाने के लिए पुलिस प्रशासन भी सतर्क नजर आ रहा है। उपद्रवियों और हुड़दंग करने वालों पर नजर रखने के लिए पुलिस की टीम लगातार क्षेत्र में पेट्रोलिंग कर रही है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि होली का पर्व शांति और सौहार्द के साथ मनाएं तथा किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

