
रायपुर। 11 मई से लागू किए चार नए श्रम सहिंता (4 Labour Codes) केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र क्षेत्रीय फेडरेशनों के संयुक्त मंच ने 12 मई 2026 को देशभर में ‘राष्ट्रीय मांग दिवस’ मनाने का आह्वान किया है। इस दौरान श्रमिकों के बढ़ते आंदोलन और हाल के दिनों में उत्तर एवं मध्य भारत में हुए श्रमिक संघर्षों के समर्थन में प्रदर्शन और अभियान चलाए जाएंगे।
छत्तीसगढ़ में भी विभिन्न जिलों में प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार द्वारा श्रम संहिताओं (लेबर कोड) की अधिसूचना जारी किए जाने का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।
छत्तीसगढ़ के संयुक्त मंच से जुड़े इंटक, एचएमएस, एटक, सीटू, एक्टू तथा बैंक, बीमा और सरकारी कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर उत्तर प्रदेश और हरियाणा में हड़ताली श्रमिकों पर हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।
संयुक्त बयान में कहा गया कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मानेसर, गुरुग्राम, फरीदाबाद और एनसीआर के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों पर दमन किया गया, जो लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य तंत्र कॉरपोरेट हितों के लिए काम कर रहा है।
26 हजार न्यूनतम वेतन की मांग
ट्रेड यूनियनों ने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच श्रमिक 26 हजार रुपए प्रतिमाह न्यूनतम वेतन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि संविदा श्रमिक 10 से 13 घंटे तक काम करने के बावजूद केवल 10 से 12 हजार रुपए प्रतिमाह पा रहे हैं और उन्हें ओवरटाइम, साप्ताहिक अवकाश, पीएफ, ईएसआई, बोनस और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं।
यूनियनों के अनुसार वर्ष 2023-24 में विनिर्माण क्षेत्र में संविदा श्रमिकों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो पिछले 25 वर्षों में सबसे अधिक है।
श्रम संहिता को बताया श्रमिक विरोधी
संयुक्त मंच ने आरोप लगाया कि नई श्रम संहिताएं कार्य के घंटे बढ़ाने और संविदा प्रणाली को मजबूत करने का काम कर रही हैं। महिला श्रमिकों के उत्पीड़न और असुरक्षित कार्य परिस्थितियों को लेकर भी चिंता जताई गई।
ट्रेड यूनियनों ने कहा कि एलपीजी और जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने श्रमिकों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं।
संयुक्त मंच के संयोजक Dharmaraj Mahapatra ने कहा कि हालिया आंदोलनों के दौरान एक हजार से अधिक श्रमिकों को गिरफ्तार किया गया है। कई ट्रेड यूनियन नेताओं पर झूठे मामले दर्ज किए गए और कुछ को नजरबंद किया गया।
उन्होंने कहा कि श्रमिकों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें “बाहरी” और “राष्ट्र-विरोधी” बताकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
ट्रेड यूनियनों ने 12 मई को होने वाले राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम में केंद्र सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें गिरफ्तार श्रमिकों और कार्यकर्ताओं की बिना शर्त रिहाई, सभी झूठे मामलों की वापसी, श्रमिक विरोधी श्रम संहिताओं को वापस लेना, ट्रेड यूनियनों के साथ त्रिपक्षीय वार्ता, भारतीय श्रम सम्मेलन का आयोजन, न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपए प्रतिमाह, 8 घंटे कार्यदिवस और अतिरिक्त काम पर दोगुना ओवरटाइम, संविदा श्रमिकों के लिए समान वेतन स्थायी नौकरी और एलपीजी सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण शामिल है।
ट्रेड यूनियनों ने समाज के सभी वर्गों से इस आंदोलन और विरोध कार्यक्रम को समर्थन देने की अपील की है।


