--विज्ञापन यहां--

लक्स का ऐड करने वाली पहली अभिनेत्री, 16 साल में शादी

By NS
On: September 8, 2026 5:43 PM
हमें फॉलो करें:
--विज्ञापन यहां--


Bollywood Unknown Story: एक समय ऐसा भी था जब फिल्मों में आने वाली अभिनेत्रियों को लेकर समाज की सोच आज जैसी नहीं थी। महिलाओं के लिए फिल्मों में करियर बनाना बड़ी चुनौती माना जाता था। लेकिन इसी दौर में एक ऐसी अभिनेत्री ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा, जिसने न सिर्फ अपनी पहचान बनाई, बल्कि पर्दे पर ‘मां’ के किरदार को भी एक अलग मुकाम दिया। यह कहानी है लीला चिटनिस की, जिन्हें भारतीय सिनेमा की शुरुआती दौर की प्रमुख अभिनेत्रियों में गिना जाता है।

आज उनकी पहचान फिल्मों में मां के यादगार किरदार निभाने वाली अभिनेत्री के तौर पर होती है, लेकिन पर्दे के पीछे उनकी जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। महज 16 साल की उम्र में शादी, चार बच्चों की जिम्मेदारी, पति से अलगाव, अकेले बच्चों की परवरिश और फिर अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनाना—लीला चिटनिस ने जिंदगी के कई मुश्किल दौर देखे।

– Advertisement –

Ad image

इतना ही नहीं, वह भारतीय सिनेमा की उन शुरुआती अभिनेत्रियों में शामिल थीं, जिन्होंने लक्स साबुन के विज्ञापन में काम किया। उनका फिल्मी सफर पांच दशक से भी ज्यादा लंबा रहा और इस दौरान उन्होंने 350 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।

पढ़ाई में भी थीं आगे, बनीं महाराष्ट्र की शुरुआती महिला ग्रेजुएट्स में शामिल

लीला चिटनिस का जन्म 9 सितंबर 1909 को कर्नाटक के धारवाड़ में एक मराठी भाषी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका शुरुआती नाम लीला नागरकर था।

– Advertisement –

Ad image

उनके पिता अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर थे। उस दौर में महिलाओं की शिक्षा को लेकर समाज में आज जैसी जागरूकता नहीं थी। इसके बावजूद लीला ने पढ़ाई जारी रखी और आर्ट्स में बीए की डिग्री हासिल की।

उस समय किसी महिला का उच्च शिक्षा हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जाता था। इसी वजह से उन्हें महाराष्ट्र की शुरुआती महिला ग्रेजुएट्स में गिना गया।

यानी फिल्मों में कदम रखने से पहले ही लीला चिटनिस ने उस दौर की सामाजिक सीमाओं को चुनौती देनी शुरू कर दी थी।

महज 16 साल की उम्र में हो गई शादी

लीला चिटनिस की निजी जिंदगी भी काफी उतार-चढ़ाव भरी रही। महज 16 वर्ष की उम्र में उनकी शादी डॉ. गजानन यशवंत चिटनिस से हो गई।

शादी के बाद उनके चार बेटे हुए। परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों के साथ लीला सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहीं। बताया जाता है कि वह अपने पति के साथ अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने वाली गतिविधियों से भी जुड़ी थीं।

लेकिन समय के साथ उनके वैवाहिक जीवन में परेशानियां बढ़ती गईं। पति की शराब पीने की आदत को लेकर रिश्ते में तनाव बढ़ा और आखिरकार दोनों अलग हो गए।

तलाक के बाद अकेले उठाई चार बच्चों की जिम्मेदारी

पति से अलग होने के बाद लीला के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने चार बेटों की परवरिश की थी।

उस दौर में एक अकेली महिला के लिए चार बच्चों की जिम्मेदारी उठाना बेहद कठिन था। आर्थिक परेशानियों के बीच लीला ने हार नहीं मानी। उन्होंने पहले शिक्षिका के तौर पर काम किया और परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं।

इसी दौरान उनका जुड़ाव थिएटर से हुआ। वह ‘नाट्य मनवंतर’ जैसे थिएटर ग्रुप से जुड़ीं और यहीं से अभिनय की दुनिया में उनका सफर आगे बढ़ने लगा।

यही संघर्ष आगे चलकर उनके लिए हिंदी सिनेमा के दरवाजे खोलने वाला साबित हुआ।

1935 में फिल्मों में रखा कदम

लीला चिटनिस ने 1935 में फिल्म ‘श्री सत्यनारायण’ से बॉलीवुड में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्हें ज्यादा बड़ी पहचान नहीं मिली, लेकिन उन्होंने लगातार काम जारी रखा।

इसके बाद 1937 में आई ‘जेंटलमैन डाकू’ से उन्हें पहचान मिलने लगी।

फिर साल 1939 में रिलीज हुई फिल्म ‘कंगन’ उनके करियर के लिए बड़ा मोड़ साबित हुई। यह उनकी पहली सिल्वर जुबली हिट फिल्मों में शामिल रही और इसके बाद वह हिंदी सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्रियों में गिनी जाने लगीं।

कभी हीरोइन थीं, बाद में बनीं पर्दे की ‘मां’

लीला चिटनिस ने अपने करियर में सिर्फ एक तरह की भूमिकाएं नहीं निभाईं। शुरुआती दौर में वह फिल्मों की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल थीं। लेकिन जैसे-जैसे हिंदी सिनेमा में उनकी उम्र और अनुभव बढ़ा, उन्होंने चरित्र भूमिकाओं की तरफ रुख किया।

1940 के दशक के अंत से उन्होंने मां और अन्य चरित्र भूमिकाएं निभानी शुरू कीं।

फिल्म ‘शहीद’ उनके करियर की शुरुआती फिल्मों में से एक थी, जिसमें उन्होंने मां की भूमिका निभाई। इसके बाद यह किरदार उनकी पहचान बनता चला गया।

दिलीप कुमार से लेकर राज कपूर तक की बनीं मां

लीला चिटनिस ने हिंदी सिनेमा के कई बड़े सितारों की मां का किरदार निभाया। उन्होंने दिलीप कुमार, राज कपूर, देव आनंद, राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों के साथ काम किया।

‘आवारा’, ‘गंगा जमुना’, ‘गाइड’, ‘नया दौर’, ‘साधना’, ‘हम दोनों’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया।

उनकी खासियत यह थी कि वह मां के किरदार को सिर्फ भावुक भूमिका तक सीमित नहीं रखती थीं। उनके अभिनय में एक मां की ममता, चिंता, मजबूती और भावनात्मक संघर्ष दिखाई देता था।

यही वजह रही कि पर्दे पर वह धीरे-धीरे हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय ‘मां’ के रूप में पहचान बनाने में सफल रहीं।

लक्स साबुन का विज्ञापन करने वाली शुरुआती अभिनेत्री

लीला चिटनिस के करियर की एक खास उपलब्धि उनका लक्स साबुन के विज्ञापन से जुड़ना भी रहा।

साल 1941 में वह लक्स साबुन का विज्ञापन करने वाली भारतीय सिनेमा की शुरुआती प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल हुईं। उस समय किसी अभिनेत्री का विज्ञापन में नजर आना बड़ी बात माना जाता था।

लक्स के साथ उनका जुड़ाव उस दौर में फिल्मों और विज्ञापन की दुनिया के बीच बन रहे नए रिश्ते का भी उदाहरण था।

पांच दशक से ज्यादा लंबा रहा फिल्मी सफर

लीला चिटनिस का फिल्मी करियर कई दशकों तक चला। उन्होंने 1930 के दशक से लेकर 1980 के दशक तक फिल्मों में काम किया।

इस लंबे सफर में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए और कई पीढ़ियों के कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा की।

बताया जाता है कि उन्होंने अपने पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में 350 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया।

यह आंकड़ा बताता है कि वह अपने दौर की कितनी व्यस्त और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल थीं।

फिल्मों से दूर होने के बाद अमेरिका चली गईं

1980 के दशक के बाद लीला चिटनिस ने फिल्मों से दूरी बना ली। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में वह अमेरिका में अपने बेटे के साथ रहने लगीं।

उन्होंने भारतीय सिनेमा के उस दौर को देखा, जब फिल्मों में अभिनय करना महिलाओं के लिए आसान पेशा नहीं माना जाता था। इसके बावजूद उन्होंने अपने दम पर पहचान बनाई और लंबे समय तक दर्शकों के बीच अपनी जगह कायम रखी।

14 जुलाई 2003 को अमेरिका में उनका निधन हो गया।

संघर्ष से सफलता तक, लीला चिटनिस की कहानी आज भी प्रेरणा देती है

लीला चिटनिस का जीवन सिर्फ एक अभिनेत्री की सफलता की कहानी नहीं है। यह उस महिला की कहानी है जिसने निजी जिंदगी की मुश्किलों के बावजूद अपने चार बच्चों की जिम्मेदारी उठाई और फिर अपने लिए एक नया रास्ता बनाया।

16 साल की उम्र में शादी, चार बच्चों की जिम्मेदारी, वैवाहिक जीवन का टूटना, नौकरी करना, थिएटर से जुड़ना और फिर फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाना—उनका सफर कई उतार-चढ़ाव से होकर गुजरा।

एक समय की प्रमुख अभिनेत्री से लेकर पर्दे की यादगार मां तक, लीला चिटनिस ने हिंदी सिनेमा में ऐसा योगदान दिया जिसे आज भी याद किया जाता है।

यही वजह है कि लीला चिटनिस को भारतीय सिनेमा के इतिहास में उन कलाकारों में गिना जाता है, जिन्होंने अपने अभिनय के साथ-साथ अपने संघर्षों से भी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल कायम की।



Source link

व्हाट्सएप से जुड़ें

अभी जुड़ें

इंस्टाग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें

Leave a Comment