
रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित पांच नए मेडिकल कॉलेजों (Medical College) की स्थापना को फिलहाल झटका लगा है। जानकारी के अनुसार, इन मेडिकल कॉलेजों के लिए भेजे गए प्रस्तावों को नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) से अनुमति नहीं मिल सकी है। आयोग ने प्रस्तावों में विभिन्न कमियों और निर्धारित मानकों से जुड़े मुद्दों की ओर संकेत किया है।
बताया जा रहा है कि जिन पांच मेडिकल कॉलेजों के लिए अनुमति मांगी गई थी, उनमें गीदम (दंतेवाड़ा), कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़ और कुनकुरी शामिल हैं।
इनमें गीदम, कवर्धा और जांजगीर-चांपा के मेडिकल कॉलेज पहले से प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के तहत प्रस्तावित थे, जबकि मनेंद्रगढ़ और कुनकुरी में नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा पिछले वर्ष की गई थी। कुनकुरी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मनेंद्रगढ़ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की विधानसभा है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से इन मेडिकल कॉलेजों के लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त करने हेतु आवेदन इस वर्ष की शुरुआत में कमिश्न्नर मेडिकल एजुकेशन के माध्यम से नेशनल मेडिकल कमिशन को भेजे गए थे। हालांकि आयोग ने मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से संबंधित आवश्यक मानकों और अधोसंरचना संबंधी कमियों का हवाला देते हुए अनुमति प्रदान नहीं की।
बताया जा रहा है कि आयोग द्वारा इंगित की गई कमियों को दूर करने के लिए एक निर्धारित समयसीमा भी दी गई थी, जिसकी अवधि 10 जून को समाप्त हो चुकी है।
इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने इसे राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की बड़ी विफलता बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त अधोसंरचना, स्थायी फैकल्टी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी किए मेडिकल कॉलेजों के लिए अनुमति मांगी गई।
डॉ. गुप्ता का दावा है कि कई संस्थानों में स्थायी चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति अभी तक पूरी नहीं हुई है, जबकि नेशनल मेडिकल कमिशन मेडिकल कॉलेजों की अनुमति देते समय स्थायी फैकल्टी और निर्धारित संसाधनों को प्रमुख आधार मानता है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की है।
हालांकि इस पूरे मामले में राज्य सरकार या स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि NMC ने प्रस्तावों को स्थायी रूप से अस्वीकार किया है या आवश्यक कमियां दूर कर पुनः आवेदन करने का विकल्प उपलब्ध है।


