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नेपाल और तिब्बत में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से तबाही के बी

By NS
On: August 28, 2026 6:40 PM
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काठमांडू: नेपाल और तिब्बत में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से तबाही के बीच एक और बड़ा खतरा सामने आया है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भूस्खलन के बाद बनी एक झील का पानी बढ़कर ओवरफ्लो होने लगा है। इससे निचले इलाकों में दोबारा अचानक बाढ़ आने की आशंका बढ़ गई है। खतरे को देखते हुए नेपाल और चीन, दोनों ने कुछ समय के लिए राहत और बचाव अभियान रोक दिया है।यह झील चोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम के पास बनी थी। रिपोर्टों के मुताबिक झील में करीब 25 लाख घन मीटर पानी जमा हो गया था। पानी बढ़ने के बाद इसका बहाव भोटेकोशी नदी की ओर जाने लगा, जिससे नदी किनारे बसे इलाकों में खतरा बढ़ गया है।

रसुवा में रेस्क्यू ऑपरेशन पर लगी रोक
झील से बढ़ते खतरे को देखते हुए नेपाल के रसुवा जिले में बचाव अभियान को अस्थायी तौर पर रोकना पड़ा। प्रशासन ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है। निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा देखते हुए कई बस्तियों को खाली कराया जा रहा है।त्रिशूली नदी आगे चलकर नारायणी नदी में मिलती है और यही नदी भारत में गंडक के नाम से जानी जाती है। इस वजह से नेपाल के साथ-साथ भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी नदी के जलस्तर को लेकर निगरानी बढ़ाई गई है।

चीन ने जारी किया हाई अलर्ट
तिब्बत की तरफ भी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। चीन ने नए खतरे को देखते हुए राहत और बचाव अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया है। अधिकारियों ने आगे और बाढ़ या भूस्खलन की आशंका को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है। तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में भी पहले से भारी तबाही हुई है और बड़ी संख्या में लोग लापता हैं।

ग्लेशियर टूटने से शुरू हुई थी तबाही
नेपाल-तिब्बत सीमा पर यह संकट बुधवार को शुरू हुआ था, जब हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों के बड़े हिस्से के टूटने से भारी मात्रा में पानी, मिट्टी और मलबा नीचे की ओर बह निकला। देखते ही देखते फ्लैश फ्लड ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया।अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार शुरुआत में जिस घटना को भूकंप माना गया था, वह वास्तव में ग्लेशियर और चट्टानों के अचानक टूटने से पैदा हुई भूकंपीय ऊर्जा थी। इसके बाद भारी मलबे के साथ पानी का तेज बहाव नदियों में पहुंचा और तबाही मचा दी।

470 से ज्यादा मौतें, 1,500 से अधिक लोग लापता
ताजा रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में 469 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि तिब्बत में कम से कम 5 लोगों की जान गई है। नेपाल में 977 और तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में 558 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। ऐसे में कुल लापता लोगों की संख्या 1,500 से अधिक है।

इस आपदा में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री भी प्रभावित हुए हैं। नेपाल के पर्यटन विभाग ने पहले 34 देशों के 668 पर्यटकों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी दी थी। इनमें बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की भी थी।

हजारों लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी टीमें
नेपाल में सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की हजारों की संख्या में टीमें राहत और बचाव अभियान में लगी हैं। हेलीकॉप्टरों की मदद से फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। प्रभावित इलाकों में भोजन, दवाइयां और जरूरी सामान भी पहुंचाया जा रहा है।बाढ़ से कई सड़कें और पुल बह जाने के कारण राहत टीमों के लिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई जगहों पर मलबा जमा होने और नदी का जलस्तर बढ़ने से अभियान और मुश्किल हो गया है।

अभी भी मंडरा रहा है नई बाढ़ का खतरा
सबसे बड़ी चिंता अब नई बनी झील को लेकर है। झील में जमा पानी का स्तर बढ़ने से अधिकारियों को डर है कि अगर पानी का दबाव और बढ़ा तो अचानक झील टूट सकती है और तेज रफ्तार से पानी नीचे की ओर आ सकता है।इसी खतरे को देखते हुए नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। राहत और बचाव दल भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित निकालना और किसी नई आपदा को रोकना है।



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