डेस्क। प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा के जीवन और चमत्कारों से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों चर्चा में है। फिल्म के साथ इसका भजन ‘तेरे ही भरोसे हनुमान…’ भी लोगों की जुबान पर है। इस भजन को अपनी आवाज देने वाले सुनील लोधी भी खास चर्चा में हैं। सुनील नेत्रहीन हैं और उन्होंने कभी स्कूल में पढ़ाई नहीं की, लेकिन मुश्किल हालात के बावजूद संगीत के प्रति अपने जुनून को कभी कम नहीं होने दिया। आज अपनी आवाज और मेहनत के दम पर उन्होंने एक अलग पहचान बनाई है।
बचपन से ही नहीं थी आंखों की रोशनी
सुनील लोधी का जन्म मध्य प्रदेश के सागर जिले के एक छोटे से गांव में हुआ। उनके पिता महेन्द्र सिंह लोधी किसान हैं और मां भाग बाई गृहिणी हैं। सुनील जन्म से ही नेत्रहीन थे। आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वे कभी स्कूल नहीं जा सके और औपचारिक शिक्षा भी हासिल नहीं कर पाए।

हालांकि, उनकी जिंदगी में संगीत ने एक अलग रास्ता दिखाया। बचपन से ही उन्हें भजन और लोकगीतों में गहरी रुचि थी।
तमूरा लेकर गांव-गांव गाते थे भजन
सुनील हाथ में तमूरा लेकर गांव-गांव घूमते और भजन व बुंदेली लोकगीत गाया करते थे। बाद में उन्होंने ट्रेनों में भजन गाना शुरू किया। वे ट्रेन के डिब्बों में यात्रियों के बीच जाकर भजन सुनाते और यात्रियों से मिलने वाली मदद से अपने परिवार का खर्च चलाते थे।
गांवों के छोटे-बड़े कार्यक्रमों में भी वे अपनी आवाज का हुनर दिखाते रहे। सीमित साधनों के बावजूद सुनील ने संगीत को ही अपनी ताकत बना लिया।
2019 में वायरल हुआ भजन, बदली जिंदगी
साल 2019 सुनील के लिए बड़ा मोड़ लेकर आया। इसी दौरान उनकी मुलाकात एक यूट्यूबर और स्थानीय संगीत प्रेमी से हुई, जिसने उनके भजनों को रिकॉर्ड किया। इनमें ‘मोरे संकट के कटैया हनुमान…’ भजन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
भजन की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि लोग इस पर सोशल मीडिया पर रील्स बनाने लगे। देखते ही देखते सुनील की आवाज को पहचान मिलने लगी और उन्हें एक गायक के तौर पर नए अवसर मिलने लगे।
इसी वायरल भजन के जरिए सुनील की आवाज निर्माता पंकज वीआरके तक पहुंची। उन्होंने सुनील को मुंबई बुलाया और उनसे एक और भजन रिकॉर्ड करवाया। खास बात यह थी कि उस समय सुनील को यह जानकारी नहीं थी कि उनके द्वारा रिकॉर्ड किया जा रहा भजन किस फिल्म का हिस्सा बनने वाला है।
‘हनुमान अंश’ में मिली बड़ी पहचान
इसके बाद फिल्म ‘हनुमान अंश’ के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने सुनील के भजनों को सुना। उनकी आवाज और भजन की भावनात्मक प्रस्तुति निर्देशक को काफी पसंद आई।
इसके बाद ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई…’ भजन को फिल्म में शामिल करने का फैसला लिया गया। फिल्म के रिलीज होने के साथ ही यह भजन भी दर्शकों के बीच अपनी जगह बना रहा है।
आज सुनील लोधी के पुराने भजन भी सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो रहे हैं। जिस शख्स ने कभी ट्रेनों में भजन गाकर अपने परिवार का गुजारा किया, उसकी आवाज अब फिल्म के जरिए बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच रही है। सुनील की कहानी बताती है कि हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, हुनर और मेहनत के दम पर अपनी पहचान बनाई जा सकती है।






