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जेसीबी हार गई… हनुमान जी नहीं हिले! उज्जैन में 170 साल पुरानी प्रतिमा ने कर दिया कमाल,घंटों मशक्कत, भारी मशीनें… फिर भी टस से मस नहीं,भक्त बोले – यह चमत्कार है, बाबा की मर्जी!

By NS
On: September 7, 2026 6:20 PM
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महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण चल रहा है। इसी प्रोजेक्ट में सती गेट के पास स्थित प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर (संकट मोचन) आ गया। मंदिर करीब 170 साल पुराना बताया जाता है। स्थानीय लोगों और सेवादारों के अनुसार इसका इतिहास 1857 के आसपास का है।

30 अगस्त को जब नगर निगम की टीम पहली बार हटाने पहुंची तो विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध किया। शहर के प्रमुख मार्गों पर चक्काजाम हुआ। प्रदर्शनकारियों ने कहा – “पहले मस्जिद और दरगाह हटाओ, फिर मंदिर की बात करो।” प्रशासन को पीछे हटना पड़ा।
फिर 4-5 सितंबर से कार्रवाई दोबारा शुरू हुई। निगम ने मंदिर का बाहरी ढांचा, दीवारें और शिखर तोड़ दिया। प्रतिमा को फोम, कपड़े और प्लास्टिक से सुरक्षित किया गया। भारी क्रेन, जेसीबी और अन्य मशीनें मौके पर पहुंचाई गईं। प्रतिमा करीब 8 फीट ऊंची है और जमीन में लगभग 3 फीट गहरी शिला में धंसी हुई है।

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यहां शुरू हुआ असली ड्रामा…
टीम घंटों मशक्कत करती रही। नीचे डेढ़ से तीन फीट गड्ढा खोदा गया, आधार की जांच की गई। लेकिन प्रतिमा एक इंच भी नहीं हिली। 12 घंटे, 30 घंटे, फिर 40 घंटे… चार-पांच दिनों में कई प्रयास हुए। भारी मशीनें भी बेकार साबित हुईं। पुरातत्व विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि जबरदस्ती हटाने से प्रतिमा में दरार आ सकती है या वह खंडित हो सकती है।

विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञों का कहना है कि यह मालवा के बेसाल्ट पत्थर की प्रतिमा हो सकती है और राजा भोज काल की निर्माण परंपरा से जुड़ी हो सकती है। विशेषज्ञों ने स्कैनिंग कराने की सलाह दी है। विशेष मशीन मंगाई जा रही है। स्कैनिंग रिपोर्ट आने के बाद ही आगे का फैसला होगा।

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भक्तों की भीड़ जुट गई। कई लोगों की आंखों में आंसू थे। पुजारी पंडित महेश बैरागी ने कहा कि प्रशासन प्रतिमा के साथ प्रयोग कर रहा है। उन्होंने लिखित गारंटी मांगी कि प्रतिमा को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। भक्तों का मानना है – “बजरंगबली नहीं जाना चाहते। यह उनकी इच्छा है।”

प्रशासन की योजना है कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से टंकी चौक पर ले जाकर विधि-विधान से स्थापित किया जाए। कुछ लोगों ने मांग की है कि टंकी चौक का नाम बदलकर ‘हनुमान चौराहा’ कर दिया जाए।
फिलहाल प्रतिमा अपनी जगह पर ही विराजमान है। चारों तरफ बैरिकेडिंग और कैनोपी टेंट लगा दिया गया है। निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा का कहना है कि तकनीकी रूप से पूरी तरह संतुष्ट होने और सभी संबंधित लोगों से चर्चा के बाद ही विस्थापन आगे बढ़ेगा।

विकास और आस्था के बीच यह घटना पूरे उज्जैन में चर्चा का विषय बनी हुई है। भक्त इसे साक्षात चमत्कार मान रहे हैं – जहां आधुनिक मशीनें हार गईं, वहां भगवान की शक्ति जीत गई।



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