कितना खतरनाक है चूहों से फैलने वाला हंटावायरस?

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हंटावायरस संक्रमण की नई रिपोर्ट के बाद चिंता बढ़ी है। कैसे फैलता है यह वायरस और इससे बचाव के उपाय क्या हैं?

डॉयचे वैले परस्तुति लालकीरिपोर्ट

अटलांटिक महासागर में होंडियस नामक क्रूज शिप पर सात लोगों के बीमार पाए जाने और तीन लोगों की मौत होने की खबर सामने आई है। इसका कारण शिप पर संदिग्ध हंटावायरस का फैलना बताया जा रहा है। इस जहाज पर करीब डेढ़ सौ यात्री और चालक दल के सदस्य मौजूद थे। हंटावायरस से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद यह जहाज अब स्पेन के कैनरी आईलैंड्स की ओर अपना रुख करेगा। यहां मरीजों को मेडिकल मदद उपलब्ध करवाई जाएगी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया है कि केप वर्डे इस ऑपरेशन को पूरा करने में सक्षम नहीं है। उनके मुताबिक, कैनरी द्वीप सबसे नजदीक और सुविधाओं वाला ठिकाना है, और इन लोगों की मदद करना स्पेन का नैतिक व कानूनी कर्तव्य है। वह भी तब, जब उस जहाज पर कई स्पेनिश नागरिक भी मौजूद हैं।

इस नए मामले से जुड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रेस रिलीज के मुताबिक सामान्य जनता के लिए खतरा अभी भी कम है और घबराने या यात्रा प्रतिबंध लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है।

हंटावायरस कैसे फैलता है?

हंटावायरस का नाम कोरियाई नदी हंतान से लिया गया है। दरअसल, 1950 के दशक में कोरिया के इस इलाके में कई सैनिक इस वायरस से बीमार हुए। लेकिन सन् 1977 में पहली बार इस वायरस की पहचान हुई। हंटावायरस वायरस का एक ऐसा समूह है जो आमतौर पर चूहों और उनकी प्रजातियों में पाया जाता है। अगर यह इंसानों में फैल जाए तो जानलेवा भी साबित हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक हर साल इस संक्रमण से 10,000 से लेकर एक लाख लोग तक प्रभावित होते हैं।

जर्मनी के रॉबर्ट कॉख इंस्टिट्यूट के मुताबिक, हंटावायरस संक्रमित चूहों के लार, मूत्र और मल के जरिए बाहर निकलता है। जब यह पदार्थ सूखकर धूल बन जाता है और हवा में उड़ता है, तो इंसानों में सांस के जरिए उनके शरीर में प्रवेश कर जाता है। फिर यही वायरस इंसान के शरीर में संक्रमण पैदा करता है और अलग-अलग लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

यह वायरस कई तरह से इंसानों में फैल सकता है। खासकर जब कोई इंसान बाहरी गतिविधियों के दौरान चूहों के मल-मूत्र के संपर्क में आता है जैसे बागवानी करते हुए, लकड़ी काटते हुए या जॉगिंग करते हुए इसके संपर्क में आए। इसके अलावा, वायरस के संपर्क में आने का खतरा तब भी अधिक होता है जब हम ऐसे इलाकों में रहते हैं, जहां चूहों की संख्या बहुत ज्यादा है।

आम तौर पर इसका संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं होता है। कभी-कभी एक दूसरे के काफी पास-पास और लंबे समय तक साथ रहने पर यह एक व्यक्ति से दूसरे में जाता है। यही कारण है कि इसका संक्रमण खासकर घर के सदस्यों या करीबी लोगों में ज्यादा फैलता देखा गया है। साथ ही, संक्रमण के शुरुआती दिनों में इस बीमारी के फैलने का खतरा सबसे अधिक होता है।

कैसे होते हैं हंटावायरस संक्रमण के लक्षण

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हंटावायरस से संक्रमित होने के लक्षण आमतौर पर वायरस से संपर्क के एक से आठ सप्ताह के भीतर शुरू होते हैं। आम लक्षणों में बुखार, सिर दर्द, शरीर दर्द और पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे पेट दर्द, जी मिचलाना या उल्टी होना शामिल है।

यह वायरस इंसानों में दो तरह की बीमारी पैदा कर सकते हैं। पहली बीमारी हंटावायरस कार्डियोपल्मोनरी सिन्ड्रोम (एचपीसीएस) के नाम से जानी जाती है, जिसे ज्यादातर अमेरिका में देखा गया है। यह बीमारी फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है, जिससे फेफड़ों में पानी भर जाता है। इससे खांसी और सांस लेने में परेशानी होने लगती है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है।

वहीं, दूसरी बीमारी को हेमरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (एचएफआरएस) का नाम दिया गया है। हंटावायरस से होने वाली इस बीमारी को ज्यादातर यूरोप और एशिया में देखा गया है। इस बीमारी में गुर्दे को नुकसान पहुंचता है। बीमारी के आखिरी चरणों में लो ब्लड प्रेशर और खून बहने की समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, कई बार तो गुर्दे अचानक काम करना भी बंद कर देते हैं।



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