नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
ओडिशा का रहने वाला एक पूरा परिवार डिटेंशन सेंटर में भेजे जाने के तीन महीने से लापता है। जगतसिंहपुर जिले में रहने वाले शेख रबानी और उनके परिवार के 14 सदस्यों के बारे में पता नहीं चल रहा है कि वे कहां हैं और क्या वे एक साथ हैं?
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक यहलोग दावा कर रहे थे कि उनका परिवार दशकों से ओडिशा में ही रह रहा है, लेकिन अभी उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है कि इन 14 लोगों के साथ क्या हुआ? इन 14 में मैरून बीबी, उनके पति शेख राजा, उनके तीन छोटे बच्चे और परिवार के नौ अन्य रिश्तेदार शामिल थे। इन सभी को नवंबर 2025 में बिना वैध दस्तावेज के बांग्लादेशी होने के शक में पुलिस ने हिरासत में लिया था।
परिवार के सदस्य इस दावे का खंडन करते हैं और कहते हैं कि उनका परिवार लंबे समय से भारत में ही रह रहा है।रबानी ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि उनके परिवार को हिरासत में लिया गया है, तो वे पुलिस स्टेशन गए और पूछा कि उन्हें कहाँ रखा गया है। पुलिस ने कोई जवाब नहीं दिया और उन्हें बाहर निकाल दिया। बाद में परिवार को बताया गया कि इन सभी को बांग्लादेश भेज दिया गया है।
इसके अलावा, रबानी के दो बड़े भाइयों को भी इसी दौरान हिरासत में लिया गया था, लेकिन उन्होंने पर्याप्त दस्तावेज दिखाने के बाद रिहाई पा ली। रबानी का कहना है कि इनके परिजनों के पास भी दस्तावेज़ थे, और उनका पिता भारत में ही जन्मा था।
परिवार के कुछ सदस्यों का कहना है कि उन्होंने बांग्लादेश से फोन पर सुना कि सभी चटगाँव में फिर से एक साथ हैं, लेकिन यह कॉल जनवरी के पहले हफ्ते में मिली आखिरी जानकारी थी और उसके बाद उनसे संपर्क टूट गया है।
पुलिस का कहना है कि 14 लोगों को बीएसएफ को सौंप दिया गया, जिन्होंने उन्हें पहले नादिया के पास से बांग्लादेश भेजा, लेकिन बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश ने कहा कि उनके पास बांग्लादेशी होने के प्रमाण नहीं हैं और उन्हें वापस भेज दिया। इसके बाद ही उन्हें फिर से पश्चिम बंगाल के हिली बॉर्डर पर देखा गया और फिर से अलग रास्तों से भेजा गया।
अधिकारियों का कहना है कि वे कानून के तहत लोगों की पहचान और सत्यापन कर रहे हैं, और अवैध प्रवासियों को सही प्रक्रिया के बाद ही डिटेंशन सेंटर में भेजा जाता है।

