

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में बुधवार को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी बनाए गए विदिशा के पूर्व विधायक शशांक भार्गव की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी।
यह याचिका जस्टिस देवनारायण मिश्रा की वेकेशनल सिंगल बेंच के समक्ष प्रस्तुत हुई थी। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि मामला एक पूर्व जनप्रतिनिधि से संबंधित है, इसलिए नियमानुसार इसकी सुनवाई विशेष रूप से निर्धारित बेंच द्वारा की जानी चाहिए। इसी कारण मामले की मेरिट पर कोई सुनवाई नहीं हुई और इसे उपयुक्त बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया।
इससे पूर्व विदिशा की द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत भी शशांक भार्गव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि मामले की जांच अभी जारी है तथा उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी से पूछताछ की आवश्यकता से इंकार नहीं किया जा सकता। अपराध की गंभीरता, जांच की वर्तमान स्थिति और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था।
गौरतलब है कि पूर्व विधायक शशांक भार्गव के खिलाफ विदिशा जिले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण (उकसाने) का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि आर्थिक लेन-देन को लेकर हुए विवाद और कथित मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर गोविन्द सिंह गुर्जर ने आत्महत्या कर ली थी।
पुलिस जांच के दौरान सामने आए वायरल वीडियो, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) तथा मृतक के परिजनों के बयानों को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर पुलिस ने शशांक भार्गव को प्रकरण में आरोपी बनाया है और जांच जारी है।
न्यायालय ने मामले को जनप्रतिनिधियों से जुड़े प्रकरणों की सुनवाई के लिए निर्धारित उपयुक्त बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 जून 2026 को होगी।


