राजनीतिक चंदा, कॉर्पोरेट का धंधा

NFA@0298
3 Min Read


लोकतांत्रिक सुधारों के लिए काम करने वाले ADR (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म) की ताजा रिपोर्ट अब चौंकाती नहीं है, बल्कि देश के बहुदलीय लोकतंत्र में भाजपा की बढती असीमित ताकत और संसदीय प्रणाली में परोक्ष रूप से कॉर्पोरेट के बढ़ते दखल को ही रेखांकित करती है।

हैरत नहीं कि 2024-25 के दौरान भारतीय जनता पार्टी को अन्य राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त दलों, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, माकपा और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीईपी) को मिलाकर मिले कुल चंदे से दस गुना चंदा मिला! वित्त वर्ष 2025 में राजनीतिक दलों को मिला 20 हजार रुपये से अधिक घोषित कुल चंदा 6,648.563 करोड़ था, जिसमें से 6074 करोड़ रुपये अकेले भाजपा के खातों गए। वहीं सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी को सिर्फ 517.394 करोड़ रुपये ही मिले।

बेशक बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का दावा है कि उसे कभी उसे 20 हजार रुपये से अधिक के रूप में चंदा नहीं मिलता, लिहाजा इस सूची में उसका नाम नहीं है। इसके बावजूद इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से भाजपा संसाधनों के मामले में सारे विपक्षी दलों की तुलना में कितनी ताकतवर होते जा रही है।

दरअसल चिंता की बात यह है कि राजनीतिक चंदों में कॉर्पोरेट का हिस्सा बढ़ता जा रहा है। आम तौर पर कॉर्पोरेट सत्ता के नजदीक रहना चाहते हैं, लेकिन जिस तरह से वह सत्तारूढ़ दल को चंदा दे रहे हैं, तो यह क्यों नहीं माना जाना चाहिए कि इसका असर जनहित के नीतिगत फैसलों और कार्यक्रमों पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पड़ता होगा।

आखिर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने संदिग्ध इलेक्ट्रोरल बांड्स के मामले में इसे लेन-देन करार देते हुए संस्थागत भ्रष्टाचार का उदाहरण बताया ही था। यही नहीं इस महत्वपूर्ण फैसले में अदालत ने साफ कहा था, कि कंपनियों द्वारा राजनीतिक चंदा देने के पीछे के कारण दिन के उजाले की तरह स्पष्ट हैं।

एडीआर की ताजा रिपोर्ट यही बता रही है कि यह मर्ज बढ़ता ही जा रहा है। बात सिर्फ पारदर्शिता की नहीं, बल्कि एक पार्टी के बढ़ते एकाधिकार की है, जिसने देश में चुनावी राजनीति को अन्य दलों के लिए लेवल प्लेइंग फील्ड नहीं रहने दिया है।

मतदाताओं को लेकर फिक्रमंद रहने वाला चुनाव आयोग क्या संस्थागत भ्रष्टाचार का रूप ले चुके इस मर्ज के इलाज के बारे में कोई कदम उठाएगा?

यह भी पढ़ें: बीते साल के मुकाबले भाजपा को चंदे में 171 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी, बाकी पार्टियों को कितना मिला?



Source link

Share This Article
Leave a Comment